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इफिसियों इफिसियों के नाम प्रेरित पौलुस की पत्री

इफिसियों के नाम प्रेरित पौलुस की पत्री
इफिसियों के नाम इस पत्री को प्रेरित पौलुस ने लिखा। इफिसुस प्रथम शताब्दी का एक प्रमुख नगर था। इस नगर के निवासियों को अपने व्यापार, ज्ञान और धर्म पर बड़ा गर्व था। उन्हें विशेषकर अरतिमिस देवी और मंदिर पर गर्व था जिसके बारे में वे कहते थे “इसे सारा आसिया और संसार पूजता है।” अपनी तीसरी प्रचार यात्रा में पौलुस ने लगभग तीन वर्ष इफिसुस में बिताए (प्रेरितों 18:23—19:41), जिसके परिणामस्वरूप परमेश्‍वर का सुसमाचार सारे आसिया क्षेत्र में फैल गया था। पौलुस ने फिलिप्पियों, कुलुस्सियों और फिलेमोन के समान इफिसियों की पत्री को भी रोमी कारावास से लिखा था।
इस पत्री को लिखने का एक उद्देश्य मसीहियों को परमेश्‍वर के आने वाले राज्य के उत्तराधिकार की महिमामय सच्‍चाइयों की शिक्षा देना था, जिन सच्‍चाइयों को आदिकाल से गुप्‍त रखा गया परंतु अब उन्हें आत्मा के द्वारा उसके पवित्र प्रेरितों और भविष्यवक्‍ताओं पर प्रकट किया गया है। वह बताता है कि हमारे उद्धार का उद्देश्य हमारे व्यक्‍तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि परमेश्‍वर की स्तुति और महिमा के लिए है। अतः वह विश्‍वासियों से आग्रह करता है कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए हो, उसके योग्य चाल चलो (4:1)। भले ही मसीही स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आत्मिक आशिषों से भरपूर किए गए हैं (1:3), फिर भी इस जगत में मसीहियों के लिए आत्मिक युद्ध एक दैनिक अनुभव होता है। अध्याय 6 में स्पष्‍ट सलाह है कि कैसे विश्‍वासी जन “प्रभु में और उसकी शक्‍ति के प्रभाव में बलवंत” बने रह सकते हैं (6:10)।
नए नियम की किसी अन्य पत्री की तुलना में इस पत्री में “मसीह में” जैसे शब्दों का सबसे अधिक प्रयोग किया गया है। विश्‍वासी “मसीह में” हैं (1:1), वे “मसीह में” स्वर्गीय स्थानों में हैं (1:3), उन्हें “उसमें” चुन लिया गया है (1:4), वे “मसीह के द्वारा” लेपालक पुत्र हैं (1:5), “उसी में” छुटकारा है (1:7), “उसमें” उत्तराधिकारी ठहराए गए (1:11), “मसीह पर” आशा रखी है (1:12), “उसी में” मुहर लगी (1:13), “मसीह के साथ” जीवित किया (2:5), “मसीह यीशु में” उठाया और बैठाया (2:6), “मसीह यीशु में” सृजे गए (2:10), “मसीह के द्वारा” निकट लाए गए (2:13), “मसीह में” बनते जाना (2:21), “मसीह में” प्रतिज्ञा के सह-उत्तराधिकारी (3:6), “उसी में” परमेश्‍वर के पास आने का साहस होता है (3:12)।
रोमियों की पत्री के समान इफिसियों की पत्री को भी धर्मविज्ञान संबंधित एक महान कृति माना जाता है।
रूपरेखा
1. अभिवादन 1:1–2
2. विश्‍वासियों की मसीह में स्थिति 1:3—3:21
3. विश्‍वासियों का व्यावहारिक जीवन 4:1—6:20
4. उपसंहार 6:21–24

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