भौंरु झ़ूरीए गिहा
झ़ूरीए गिहा
भेत
लिखणैं आल़अ: राज़अ सुलैमान
सन: 971 का 965 ईसा आजी
ऐहा कताबा दी आसा खासकर गिहा लिखी दी ज़ेथ मर्ध अर बेटल़ी आप्पू मांझ़ै एकी-दुजै का इहअ खोज़ा कि तिंयां किहै झ़ूरा।
अह कताब आसा राज़ै सुलैमानै लिखी दी ज़ेऊ ज़मानैं सह राज़ करा त। ऐहा कताबे खास गल्ल आसा एकी-दुजै लै झ़ूरी बैह। अह कताब खोज़ा इहअ कि एकी-दुजै लै झ़ूरनअ निं बूरअ हंदअ पर मर्धा बेटल़ी निं बैहे असली बधाना का बाधू गल्ला करदै लागणअ। एकी-दुजै लै झ़ूरनअ दिला-मन्नां का:
तूह निं आपणैं दिलै मुंह सुआई होर कोही डाही
अर नां आपणीं बाह दी मुंह छ़ाडी होरी कोही ढाकी,
किल्हैकि झ़ूरी हआ मौता ज़िहअ ज़ोर!
एते ज़ल़ण निं खल़ै ज़िऊंणै दैंदी,
एते आग रहा एही ज़ल़दी लागी,
ज़ेही कि बिधाते आग।
एता निं पाणींओ दरैअ बहाऊई सकदअ
अर नां खार समुंदर डबेऊई सकदअ,
एता निं कुंण सेठ मणछ आपणीं
सारी ज़ैदात दैई बी मोलै लई सकदअ।
(8:6,7)
कताबे बांड
दाखे रसे नशै का आसा झ़ूरी झ़ूरीओ नशअ खास्सअ 1:1-17
झ़ूरी करै हआ सोभै गल्ला बित्ती 2:1—3:5
बैह 3:6—5:1
ज़हा लै झ़ूरा, सह किल्है हआ सोभी का खास 5:2—7:13
लोभी अर झ़ूरी 8:1-14
Currently Selected:
भौंरु झ़ूरीए गिहा: OSJ
Highlight
Copy
Compare
Share
Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in
This work is licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 License.