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सैणीं गल्‍ला 16

16
1मणछ सोठा कई गल्‍ला,
पर ज़िभा का बैण भराऊणैं आल़अ हआ बिधाता।
2मणछ सोठा इहअ कि ज़ुंण तेऊ किअ सह ई आसा ठीक,
पर बिधाता तोला तेऊओ मन्‍न।
3सोभै गल्‍ला छ़ाडा बिधाता सेटा,
तेऊ करनी थारी गल्‍ला सफल।
4ज़ुंण बी च़िज़ा बिधाता बणाईं, तेतो आसा किज़ै नां किज़ै मकसद,
इधी तैणीं कि कदुष्ट मणछ आसा बनाशे धैल़ी लै।
5घमंडी लै करा बिधाता नफरत,
तिंयां निं सज़ा का बच़ी सकदै।
6ज़ै तम्हैं मानदार अर शुचै-पाक्‍कै रहे, तै छ़ाडणीं बिधाता तम्हां लै माफी,
ज़ै तम्हैं ज़िहअ बिधाता बोले तिहअ ई करे, तै निं थारअ किछ़ै बूरअ हणअ।
7ज़ै बिधाता तम्हां करै खुश होए,
तै सका थारै दुशमणा संघै बी मेल़-ज़ोल़ हई।
8धोखै करै खास्सी कमाई का आसा,
मानदारी दी खटअ द धख ज़िहअ ई भलअ।
9मणछ सोठा आपणैं मन्‍नैं खास्सी गल्‍ला,
पर असली दी कहा बाता लागा डेऊणअ, तेता खोज़ा बिधाता आप्पै।
10राज़े खाखा का निखल़ै दै बैण हआ सुरगा बाखा,
तेऊओ फैंसलअ हआ ठीक ई।
11बिधाता च़ाहा कि हर तराकल़ी अर बाटा दी निं लोल़ी धोखअ हुअ,
लणैं-दैणैं लै निं लोल़ी कोहै ठगै।
12राज़अ निं बूराई मंदअ ई,
किल्हैकि तेऊए राज़ा दी हआ नसाफ तै रहा सह बणी।
13राज़अ च़ाहा शुची गल्‍ला शुणनअ,
ज़ुंण शुचअ बोला, तेऊओ साथ बी हेरा तेखअ सह दैई।
14अक्ली आल़अ मणछ करा राज़ै खुश डाहणें कोशिश,
किल्हैकि ज़ै राज़ै रोश्शै गई एछी, तै सका कुंण नां कुंण मरी बी।
15ज़ै राज़अ खुश होए अर तम्हां लै राज्ज़ी होए,
सह हणअ तम्हां लै बरसाती ज़िहअ, अर तम्हैं रहणैं तै ज़िऊंदै।
16अक्ल भेटणीं हआ सुन्‍नैं का बी राम्बल़ी,
अर समझ़ एछणी हआ च़ंदी का भली।
17भलअ मणछ हांढा तैहा बाता, ज़ेथ बूराई निं हंदी,
तैही डाहणअ धैन कि तम्हैं कैहा बाता च़ाल्‍लै, तेता करै सका थारी ज़िन्दगी बच़ी।
18ज़हा मणछा ठोहल़ च़ाल्‍ली दी होए लागी अर
ज़ुंण मणछ बरैबाद आसा हणैं आल़अ, तेता का आजी एछा तेऊ घमंड।
19मानदार रही गरीब रहणअ आसा
कहा लुटी-घशिट्टी करै सेठ हणैं का भलअ।
20ज़ुंण बोल़णैं का आजी बच़ार करा, सह हआ सफल,
ज़सरअ भरोस्सअ बिधाता दी आसा, सह रहा सदा खुश।
21सैणैं अर अक्ली आल़ै मणछा लै बोला सोभै समझ़कार,
मिठअ बोल़णैं आल़अ सका होरी बी सखाऊई।
22अक्ल आसा एही सोबल़ ज़ुंण ज़िन्दगी दैआ,
पर कबुधी मणछा भेटा तेऊए ऐडी गल्‍ला लै सज़ा।
23अक्ली आल़अ मणछ करा गल्‍ला करनै का आजी बच़ार,
ज़ुंण सह बोला, तेता करै भेटा होरी बी शिक्षा।
24झणैल़ू बैण हआ मखीरा ज़िहै,
सुआद बी मिठअ अर शाह बी फिरा हरअ।
25एक बात हआ एही बी ज़ुंण मणछा का भली ज़ाण्हिंआं,
पर सह सका मौते दुआरै बी पजैल़ी।
26मज़दूरे भुख ई कराऊआ तेऊ का खास्सी मैन्थ
किल्हैकि तेऊए भुख करा तेऊ कामां करना लै मज़बूर।
27उपद्रभी मणछ सोठा कि तेऊ किहअ करै पै करनै होर तंग,
तिन्‍नें हआ खाखे बैण बी आगीए लुपल़ै ज़िहै दहंदै।
28कदुष्ट मणछ पाआ एही फुआह,
ज़ेता करै आफ़त बी पल़ा अर साथ-संगत बी चुटा।
29कदुष्ट मणछ दैआ आपणैं साथी-संघी लै बी धोखअ,
संघा निंयां तिन्‍नां बरैबादी बाखा।
30ज़ुंण तम्हां लै सानै-कानै गल्‍ला करा,
तिन्‍नें मन्‍नैं हआ किज़ै नां किज़ै छ़ल़-कपट।
31धर्मीं मणछो पुआज़अ आसा लाम्मी अमर,
अर पल़ू हआ शोभा दैणैं आल़अ मुगट।
32बल रहैऊंणै का आसा सबर डाहणअ भलअ,
अर आपणअ मन्‍न बशै डाहणअ हआ सारी नगरी ज़ितणैं का बी भलअ।
33लोग पाआ पुछ़णा लै परच़ी कि बिधाता किज़ै च़ाहा,
पर बिधाता छ़ांटा तेता मांझ़ै एक आप्पै।

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