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सैणीं गल्‍ला 15

15
बिधाता हआ सोभी भाल़अ लागअ द
1राम्बल़ै करै गल्‍ला करी हआ रोश्श बी ठांढअ,
पर कल़ुई गल्‍ला पाआ होर बी खास्सअ खरोल़।
2अक्ली आल़अ मणछ ज़ाणा लोगा का ज्ञैन खोज़ी,
पर कबुधी मणछा का निखल़ा ऐडी ई गल्‍ला।
3बिधाता हआ सारै दी भाल़अ लागअ द कि संसार किज़ै करा,
सह भाल़ा हाम्हां कि हाम्हैं भलअ करा कि बूरअ।
4झणैल़ू गल्‍ला करनी हआ तेऊ बूटा ज़ेही ज़ेता का ज़िन्दगी भेटा,
पर उंबल़ी गल्‍ला करै हआ शाह बी धिठअ।
5ईजा-बाबा लै नशूंण हणअ आसा कबुध ई,
पर ज़हा सोर-समझ़ हुई, सह मना तिन्‍नें सोभै गल्‍ला।
6भलै मणछ जाआ सेठ हई,
पर कदुष्ट मणछ हआ एकी धैल़ै ज़रूर दाल़जी।
7ज्ञैन खोज़ा तिंयां ई ज़हा का अक्ल हुई,
ऐडै का निं किछ़ै हंदअ।
8ज़ेभै भलै मणछ अरज़ करा, बिधाता हआ तेता लै खुश,
पर कदुष्ट मणछे बल़ीदाना लै करा सह नफरत।
9ज़ुंण भलअ करा तेऊ लै झ़ूरा बिधाता बी,
पर कदुष्ट मणछे च़ाल-च़लणा का हआ तेऊ नफरत।
10ज़ुंण सुंबल़ी बाता का कबाता पेठा, तेऊ भेटणीं घोर सज़ा
अर ज़ुंण नैरी-समझ़ाऊई लै ज़ीद डाहा, सह मरा छ़ेक्‍कै।
11ज़ेऊ संसारै मणछ मरी करै पुजा, तिधी बी हआ बिधाता भाल़अ लागअ द,
तेऊ का हआ इहअ बी थोघ कि थारै दिलै किज़ै आसा।
12सुहांगा करनै आल़अ मणछ निं नैरी समझ़ाऊई मंदअ,
सह निं अक्ली आल़ै मणछा का सलाह लंदअ।
13ज़ै दिलै खुशी हुई तेता करै सह जाआ मणछे मुंहैं शुझुई,
पर ज़ै दिल चुटअ, तेता करै हआ आत्मां बी दुखी।
14ज़हा सोर समझ़ हुई, सह च़ाहा शिखल़णअ,
पर कबुधी मणछ जाआ ऐडी गल्‍ला करै ई रज्ज़ी।
15गरीब मणछे ज़िन्दगी हआ कठण,
पर खुशी दिले मणछे ज़िन्दगी हआ मौज़।
16सेठ हई आफ़ता दी पल़णै का आसा,
बिधाते डरा हेठै दुखी रहणअ भलअ।
17नफरत करनै आल़ै घअरै शिखा खाणैं का आसा,
तेऊ घअरै शुक्‍की भाज़ी करै रोटी खाणीं ठीक ज़ुंण इज़त करा!
18रोश्शा करै हआ झ़गल़ै पैईदा,
पर सबर डाही हआ मेल़-ज़ोल़।
19ज़ैऊंकर हणअ हआ कांडे झ़ाकल़ा बाती हांढणअ,
पर मानदार मणछा निं किछ़ै आफ़त पल़दी।
20अक्ली आल़ी लुआदा करै हआ बाब खुश,
पर ऐडअ मणछ निं आपणीं ईजो अदर करदअ।
21कबुधी मणछ हआ आपणीं ऐडी गल्‍ला लै खुश,
पर ज़हा सोर-समझ़ हुई, सह हांढा आज़री बाता।
22राम्बल़ी सलाह करै हआ हर काम सफल,
एता बाझ़ी हआ सारी तरकिबा बृथा।
23ज़ै मोक्‍कै दी राम्बल़अ ज़बाब दैनअ,
तेता करै हआ सोभ लोग खुश।
24अक्ली आल़अ मणछ हांढा तैहा बाता, ज़ेथ तेऊए ज़िन्दगी सफल हआ,
सह निं तैहा बाता डेऊंदअ ज़ेथ तेऊए ज़िन्दगी बरैबाद हआ।
25ज़ुंण घमंडी आसा, तेऊओ घअर निं बिधाता हणैं दैंदअ,
पर बिधबा बेटल़ीए ज़ैदात डाहा सह बच़ाऊई।
26कदुष्ट सोठा लै करा बिधाता नफरत,
शोभली गल्‍ला करनै आल़ै मणछा लै हआ सह खुश।
27मांण करनै आल़अ पाआ आपणैं टबरा लै बी आफ़त,
पर ज़ुंण रेशपत लणैं-दैणैं का नफरत करा, तेऊए अमर हआ खास्सी।
28भलअ मणछ करा गल्‍ला करनै का आजी बच़ार,
पर कदुष्ट दैआ हेरा-हेरी ज़बाब, संघा हआ आफ़त खल़ी।
29ज़ेभै भलै मणछ बिधाता का अरज़ करा, तिन्‍नें हेरा सह शूणीं,
पर कदुष्ट मणछा का रहा सह दूर ई।
30प्रैश्शअ मुंह भाल़ी हआ दिल खुश
अर खुशी दैणैं आल़ै समादा शूणीं फिरअ शाह हरअ।
31ज़ुंण नैरी-समझ़ाऊई लै धैन दैआ,
सह हआ अक्ली आल़अ मणछ।
32ज़ुंण शिक्षा नांईं मंदअ, सह करा आप्पू लै आप्पै घात,
पर ज़ुंण नैरी-समझ़ाऊई करै समझ़ा, तेऊ एछा अक्ल।
33बिधातो अदर करी एछा अक्ल ई,
ज़ै तम्हां अदर लोल़ी, तै लागा शरीफ हणअ।

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