YouVersion Logo
Search Icon

मिका 2

2
गरीबा लै ज़ुल्म करनै आल़ै लै लानत
1तिन्‍नां लै भाल़ केही आफ़त आसा ज़ुंण राची च़ैनैं सुत्ती कदुष्ट गल्‍ला अर बूरै काम करनै सोठा! राच भैंदी ज़ांऊं मोक्‍कअ भेटअ तेखअ करा तिहअ ज़िहअ बूरअ करनअ सोठअ! 2तिंयां करा होरीए खेचो मांण संघा गिम्मा तिन्‍नां आप्पू लै, तिंयां च़ाहा होरीए घअर आप्पू लै संघा करा तेथ कबज़अ। ईंयां इहै कदुष्ट करा साथी-संघी अर टबरा लै ज़ुल्म अर होरीए ज़ैदात करा ईंयां खाई हिढ!
3तैही बोलअ मालक बिधाता इहअ, “शूणां! मंऐं हेरअ सोठी कि ऐबै करनअ मुंह तम्हां कदुष्ट देशो बनाश। हुंह हणअ तम्हां लै थारै कैल़ै जोचै दै जूँआं ज़िहअ, तम्हां कदुष्ट मणछा मांझ़ै निं तेता कोह पोर्ही खोल्ही सकदअ। तेखअ निं तम्हां आज़रै चल़ैटे घमंड करी हांढणअ भेटणअ, किल्हैकि मुंह पाणीं तम्हां लै घोर आफ़त। 4ज़ेभै सह बगत एछणअ, तेभै करनअ लोगा एही शोगे गिह बोली थारअ सुहांग,
‘हाम्हैं हुऐ पठी बरैबाद!
ज़हा ज़ैगे बिधाता हाम्हैं मालक बणाऐं तै,
सह ज़ैगा दैनी तेऊ होरी लै!
अह हुई रहैनीए गल्‍ल! तेऊ किई हाम्हां का म्हारी जदी ज़ैगा दूर!
तेऊ दैनी म्हारी ज़ैगा म्हारै दुशमणा लै ज़ुंणीं हाम्हैं कैद करी निंयैं!’”
5तैही ता आजू ज़ेभै भिई अह ज़ैगा मुंह बिधाते परज़ा लै परच़ी पाई अर राश्शी करै बांडी दैणीं, तेथ निं तम्हां किछ़ हेस्सअ भेटणअ।
6तिंयां करा मुल्है इहअ प्रच़ार, “ऐबै निं हाम्हां का ज्ञैन खोज़दअ लागै! इना गल्‍लो प्रच़ार निं कोही लोल़ी किअ। ईंयां डरैऊंणी अर शर्मिंदै करनै आल़ी गल्‍ला निं हाम्हां लै कधि निभणी।” 7तम्हां याकबे आद-लुआदा निं इहअ बोल़णअ लागा। तम्हैं कै सोठा कि बिधाते आत्मां तम्हां लै कबल्‍लअ लाअ धीर धरी? ज़ै तम्हैं भलअ करना लै झ़ूरे, तै हेरनअ तम्हां मनी कि मेरअ समाद आसा भलअ।
8बिधाता बोला इहअ, “तम्हैं हुऐ मेरी परज़ा जैंदरी दुशमणा ज़िहै! बाता हांढदी लुटा तम्हैं लोगा का तिन्‍नें च़ोल़ै तोही ज़ेभै तिंयां इहअ सोठा कि तिन्‍नां निं किछ़ै खातरअ आथी! तम्हैं निं तेऊ मणछा बी लुटणैं का छ़ाडदै ज़ुंण जुधा का आपणैं घअरा लै फिरा! 9तम्हैं लुटा मेरी आपणीं परज़ा मांझ़ै बेटल़ी बी। तम्हैं लुटा तिन्‍नें घअर ज़ेता लै तिंयां खास्सी झ़ूरा, ज़ुंण हुंह तिन्‍नें लान्हैं लै च़ाहा कि तिंयां मौज़ करे, तेता बी लुटा तम्हैं तिन्‍नां का पोर्ही। 10ऐबै निखल़ा इधा का दूर! ऐबै निं तम्हैं ऐहा ज़ैगा जोगी आथी, अह ज़ैगा शोटी तम्हैं बाख छ़ोतली करी, तैही लाअ मंऐं छ़ेक्‍कै थारअ बनाश करी।
11“ज़ेभै कुंण मणछ तम्हां का झ़ुठअ समाद खोज़ा, तेतो ता करा तम्हैं विश्वास! तिंयां खोज़ा तम्हां का, ‘तम्हां का हणअ खास्सअ दाखो रस अर खास्सी शराब।’ इहै ई समाद ता तम्हैं शुणनअ च़ाहा! अर इहअ खोज़णैं आल़ै गूरा बी मना।
12“याकबे आद-लुआद, मेरी रही तम्हां लै ज़बान कि मुंह करनै तम्हैं सोभै कठा। इज़राईली परज़ा मांझ़ै ज़ुंण ज़िऊंदै बच़णैं, तिंयां आणनैं मुंह बापस। ज़िहअ फुआल आपणीं भेडे हेल़्ही शाल़ा भितरी झाल़ा, तिहै ई करनै मुंह तम्हैं कठा। तम्हैं हणैं दहल़ै खास्सी भेडा ज़िहै। तम्हैं हणैं हज़ारो-लाखों मणछ।
13“ज़हा थारी कैद खाने प्रऊल़ ढोल़णीं, सह हांढणअ तम्हां आजू-आजू। तेखअ निखल़णैं तम्हैं प्रऊल़ी बाती बागै। सह आसा हुंह बिधाता थारअ राज़अ अर तम्हैं नढैऊणैं मुंह आप्पै।”

Currently Selected:

मिका 2: OSJ

Highlight

Copy

Compare

Share

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in