लेबी बधान 13
13
घेरी दी दुखणअ अर कोहल़े बमारी लै बधान
1तेखअ बोलअ बिधाता मोसा अर हारणा का, 2“ज़ै कहा मणछे घेर किधा का शुंआंईं दी होए, या दुखणअ या घणीं फिमशी होए, या कोहल़े बमारी ज़ेही शिंची शुझिए, तेऊ मणछा आणै हारण या प्रोहता मांझ़ै कहा एकी सेटा लै।
3“प्रोहता भाल़णीं सह बमारी राम्बल़ै करै, ज़ै प्रोहता का शुझिए कि तैहा बमारीए ज़ैगा गऐ शराल़ अर मास्स शेतै फिरी अर ज़खम बी गअ डुघअ हई, तेऊ बोल़णअ तेखअ इहअ, ‘अह आसा कोहल़ अर तूह हुअ छ़ोतलअ।’
4“पर बमारीए तैहा ज़ैगा सिधी शिंची अर डुघअ ज़खम होए अर शराल़ अज़ी बी काल़ै ई होए, तेता लै दैऐ प्रोहत तेऊ मणछा लै साता धैल़ी तैणीं सोभी मणछा का ज़ुदै गोटी डाहणेंओ हुकम।
5“तेखअ ज़ै सह बमारी साता धैल़ी तैणीं ज़ेही कि तेही ई होए, तेखअ करै प्रोहत तेऊ मणछा लै साता धैल़ी होर सोभी मणछा का ज़ुदै रहणैंओ हुकम।
6“तेखअ करै प्रोहत सातुऐ धैल़ै भिई तेऊ मणछे ज़ाच़-भाल़, ज़ै तेऊ का ज़ाण्हिंए कि सह बमारी हुई धख ठीक अर सह निं तेता का खास्सी बढी, तेखअ बोलै प्रोहत तेऊ लै, ‘तूह आसा शुचअ, अह आसा दुखणअ अर आपणैं झिकल़ै-टाल्है धोई शुचअ हई सका तूह आपणैं घअरा लै डेऊई।’
7“ज़ै प्रोहते ज़ाच़-भाल़ करनै का बाद घअरै डेऊई सह बमारी भिई निखल़े, तेखअ एछै सह मणछ भिई प्रोहता सेटा लै फिरी।
8“तेखअ ज़ै प्रोहता का ज़ाच़-भाल़ करी इहअ शुझिए कि सह बमारी लागी घेरी दी खास्सी बढदी, तेखअ बोलै सह इहअ, ‘अह आसा कोहल़, तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’
9“तम्हां मांझ़ै ज़हा बी कोहल़ा ज़ेही बमारी होए, तेऊ आणै प्रोहता सेटा लै। 10प्रोहत करै तेते राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़, ज़ै सह दुखणें शुंआंईं दी ज़ैगा पाका करै शेती होए हुई दी अर तेता फेर शराल़ अर मास्सा दी बी शिंची होए निखल़ी दी, 11तेता लै खोज़ै प्रोहत इहअ, ‘अह आसा पराणअ कोहल़, तूह हुअ छ़ोतलअ अर ताह हुअ ऐबै सोभी मणछा का दूर ज़ुदै रहणअ।’
12-13“ज़ै सह बमारी मुंडा का घुंढी तैणीं सारी देही दी होए, तेते करै प्रोहत राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़, ज़ै सारी घेरी सिधी शिंची होए तेता लै बोलै प्रोहत, ‘तूह आसा शुचअ।’
14-15“ज़ै तेथ सारै दी पाक्कै दै दुखणैं संघै शिंची शुझिए, तेते राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़ करी बोलै प्रोहत तेऊ मणछा लै, ‘अह आसा कोहल़ अर तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’
16-17“पर ज़ै सह दुखणअ ठीक होए गअ द हई, अर पिछ़ू सिधै शेतै दाग होए रहै दै, तेते राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़ करी बोलै प्रोहत तेऊ मणछा लै, ‘तूह गअ ऐबै बमारी का राम्बल़अ हई, ऐबै हुअ तूह शुचअ।’
18-19“तेखअ ज़ै कहा मणछा दुखणैं ठीक हणैं बाद घेरी दी तैहा शुंआंईं दी ज़ैगा लाल-शेतअ दाग पल़े, सह रहैऊऐ तेऊ प्रोहता का। 20प्रोहता का तेथ इहअ शुझिए कि ज़खम आसा डुघअ गअ द डेऊई अर तेथ फेर शराल़ बी आसा शेतै गऐ दै फिरी, सह आसा कोहल़, प्रोहत खोज़ै तेऊ मणछा का, ‘अह आसा कोहल़, तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’
21“पर घेरी दी तैहा बमारीए ज़ैगा प्रोहता का शुझिए कि तेते शराल़ निं शेतै आथी हुऐ दै अर ज़खम बी आसा शुक्कअ द, तै डाहै प्रोहत तेऊ मणछा होरी सोभी लोगा का दूर साता धैल़ै तैणीं गोटी। 22तिन्नां धैल़ै भितरी ज़ै सह दुखणअ खास्सअ बढे, तेखअ खोज़ै प्रोहत तेऊ मणछा का, ‘तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ किल्हैकि अह आसा कोहल़े बमारी।’
23“पर ज़ै सह दुखणअ तेता का खास्सअ निं होए, तै आसा सह दुखणैं करै पल़अ द दाग, तेता लै बोलै प्रोहत तेऊ मणछा लै, ‘तूह आसा शुचअ।’
24“ज़ै कुंण मणछ घेरी दी किधी आगी करै दझ़े अर तैहा ज़ैगा लाल-शेतअ दाग पल़े, 25प्रोहत करै तेते राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़। ज़ै तेऊ का इहअ शुझिए कि तेते शराल़ अर सह बमारीए ज़ैगा फिरी शेती अर ज़खम बी आसा डुघअ, सह आसा कोहल़, तेता लै खोज़ै प्रोहत तेऊ मणछा का, ‘दझ़ी दी ज़ैगा लागी कोहल़, तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’
26“पर ज़ै प्रोहता का शुझिए कि तेते शराल़ अर तैहा बमारीए ज़ैगा निं शेतअ दाग पल़अ आथी अर सह ज़खम बी आसा शुक्कदअ लागअ द, तेता लै डाहै प्रोहत तेऊ मणछा होरी सोभी लोगा का साता धैल़ी तैणीं होर ज़ुदअ। 27साता धैल़ी तैणीं ज़ुदै कांगनरांगै डाही करै प्रोहत तेखअ भिई तेते राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़, ज़ै सह ज़खम खास्सअ हिभरे, तै बोलै प्रोहत इहअ, ‘अह आसा कोहल़, तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’
28“पर ज़ै सह ज़खम नांईं हिभरे अर सह ठीक होए हंदअ लागअ द अर ज़ै तैहा ज़ैगा घेरी दी सिधअ दाग होए पल़अ द, तेता लै बोलै प्रोहत इहअ, ‘ऐबै रहअ एथ सिधअ दाग, तूह आसा ऐबै शुचअ।’
29“ज़ै कहा मर्ध या बेटल़ी मुंडै या छ़ंऊंटी दी दुखणअ निखल़े, 30प्रोहत करै तेते राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़। ज़ै तेथ डुघअ ज़खम शुझिए अर तिधे शराल़ भौंरै होए गऐ दै फिरी, तेता लै खोज़ै प्रोहत, ‘अह आसा कोहल़, तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’
31“पर ज़ै प्रोहता का शुझिए कि सह आसा फिमशी निखल़ी दी, तेतो ज़खम ता आसा डुघअ पर तिधे शराल़ आसा राम्बल़ै काल़ै, तेता लै डाहै प्रोहत तेऊ मणछा साता धैल़ै तैणीं सोभी लोगा का दूर। 32ज़ै इना धैल़ै भितरी सह फिमशी नांईं बढे, ज़ै तिधे शराल़ तिहै ई राम्बल़ै काल़ै होए अर तेतो ज़खम बी डुघअ नांईं होए, 33तै छाम्बै तैहा फिमशी फेरे शराल़ पोर्ही पर फिमशी प्रैंदे शराल़ दैऐ रहणैं। तेखअ डाहै प्रोहत तेऊ मणछा भिई साता धैल़ी तैणीं होरी सोभी मणछा का दूर। 34इना साता धैल़ै भितरी ज़ै सह फिमशी नांई बढे अर सह ज़खम बी डुघअ निं होए, प्रोहत बोलै तेऊ मणछा राम्बल़ै करै ज़ाच़ी-भाल़ी, ‘ऐबै धो आपणैं झिकल़ै-टाल्है, तूह आसा शुचअ।’
35-36“बादा का ज़ै शुचै हणैं बाद बी तेऊ मणछा सह फिमशी खास्सी बढे, तेखअ ज़ै तैहा ज़ैगे शराल़ काल़ै बी किल्है नां होए, प्रोहत खोज़ै तेऊ मणछा का, ‘तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’ 37पर ज़ै प्रोहता का शुझिए कि सह फिमशी हुई ठीक अर शराल़ बी आसा राम्बल़ै काल़ै, तै बोलै प्रोहत, ‘तूह आसा शुचअ।’
38“ज़ै कहा मर्ध या बेटल़ीए घेरी दी किधी बी शिंची होए, 39प्रोहत करै तेते ज़ाच़-भाल़, ज़ै घेरी दी तिंयां सिधै शेतै दाग होए, प्रोहत खोज़ै तेऊ मणछा लै, ‘तूह आसा शुचअ।’
40-41“ज़ै कसरै मुंडे आजू-पिछ़ू किधी का बी शराल़ अल़ी करै निखल़अ होए, सह मणछ आसा ताम्बल़अ पर सह आसा शुचअ।
42-43“पर प्रोहत करै तेऊए राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़, ज़ै तेऊए ताम्बल़ै माथै या मुंडै दुखणैं करै एही शिंची होए निखल़ी दी ज़ुंण कोहल़े बमारी ज़ेही शुझिआ, सह आसा कोहल़, तेता लै खोज़ै प्रोहत, 44‘अह आसा कोहल़, तूह हुअ ऐबै छ़ोतलअ।’
45“ज़हा कोहल़ निखल़े, सह रहै लैल़ी बणी, नां आपणैं मुंडै कांगी लाई, नाका तैणीं डाहै आपणीं खाख शाट्टै करै बुदरी अर बाता हांढदी रहै ज़ोरै-ज़ोरै इहअ बोल्दअ लागी, ‘हुंह आसा छ़ोतलअ, हुंह आसा छ़ोतलअ।’ 46ज़ेभै तैणीं तेऊ कोहल़ रहे, तेभै तैणीं आसा सह छ़ोतलअ अर सह रहै तेभै तैणीं सोभी का ज़ुदअ गराऊंआं अर बसती बागै दूर एक्कै ज़ण्हअ।#लूक. 17:12
छ़ोतलै झिकल़ै
47-50“ज़ै लाला रांगा ज़िहअ या हरै रांगा ज़िहअ दाग किधी बी बाछे या ऊने झिकल़ै दी या किज़ू खाला का बणाईं दी च़िज़ा दी शुझिए, तिन्नां झिकल़ै अर खाला का बणाईं दी च़िज़ा दैऐ प्रोहता का राम्बल़ै करै ज़ाच़-भाल़ करनी। प्रोहत डाहै तिन्नां च़िज़ा साता धैल़ै तैणीं होरी च़िज़ा का ज़ुदै,#मोत्त. 8:4; मार्क. 1:44; लूक. 5:14; 17:14 51इना एतरै धैल़ै भितरी ज़ै सह भुफी तिन्नां बाछे या ऊने झिकल़े ताण-बाणा दी बढे, या कहा खाला करै बणाईं दी च़िज़ा दी खास्सी छिंघिए, तै समझ़ै इहअ कि अह आसा गाल़णै आल़अ कोहल़, सह च़ीज़ च़ाऐ किछ़ी बी कामें किल्है निं होए तेता लै बोलै प्रोहत, ‘अह आसा कोहल़ 52किल्हैकि एथ छिंघुई अह भुफी खास्सी।’ तेखअ तिंयां झिकल़ै च़ाऐ बाछे या ऊने झिकल़ै होए या किज़ै पशूए खाला करै होए बणाऐं दै, तिन्नां छ़ोता आल़ै झिकल़ै पाऐ आगी जैंदरी दहई।
53“ज़ै प्रोहता का इहअ शुझिए कि सह भुफी निं तिन्नां बाछे या ऊने झिकल़ै या खाला करै बणी दी च़िज़े ताण-बाणा दी तेता का खास्सी बढी, 54तिन्नां च़िज़ा या झिकल़ै लै दैऐ प्रोहत धोणेंओ हुकम, संघा डाहै तेता भिई साता धैल़ै तैणीं होरी झिकल़ै या च़िज़ा का ज़ुदै। 55तेखअ करै प्रोहत भिई तेते ज़ाच़-भाल़। ज़ै सह भुफी नांईं बी बढे पर सह हरअ या लाला रांगो दाग आसा तिहअ ई, तै आसा सह झिकल़अ या खाला करै बणाईं दी च़ीज़ छ़ोतली, तेता पाऐ आगी जैंदरी दहई।
56“पर ज़ै प्रोहता का शुझिए कि सह भुफीओ दाग धोऊअ पर धख आसा तेथ अज़ी बी, तेखअ धेल़ै तेऊ बाछे या ऊने झिकल़ै तैहा ज़ैगा का पोर्ही। 57बादा का ज़ै सह तिहअ दाग तेऊ बाछे या ऊने झिकल़ै दी या खाला करै बणाईं दी किज़ू च़िज़ा दी भिई शुझिए, तेखअ पाऐ तेता आगी जैंदरी पठी दहई।
58“पर ज़ै तेऊ बाछे या ऊने झिकल़े ताण-बाणा या खाला करै बणाईं दी च़िज़ा का धोई करै सह दाग पठी खतम होए, तेता लऐ तेखअ एकी बारी भिई धोई, तेखअ हणअ सह शुचअ।
59“तिंयां च़ाऐ बाछे या ऊने झिकल़ै होए या खाला का बणाईं दी किज़ै होर च़िज़ा दी भुफी होए, तेता शुचै अर छ़ोतलै बछ़ैणना लै आसा अह ई बधान।”
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