आयूब 7
7
ज़िऊंणअ इहअ कठण किल्है आसा
1“मणछे ज़िन्दगी आसा बेघै कठण
हाम्हां लागा मज़दूरा ज़ेही ज़ोरा-ज़ोरी मैन्थ करनी,#आयू. 15:5; 13; 14
2हाम्हैं आसा चटाक्क धुप्पै दी कामां करदै गलामा ज़िहै
ज़ुंण छ़ैल्ली लोल़ै हआ लागै दै अर
हाम्हैं आसा मज़दूरा ज़िहै ज़ुंण आपणीं मज़दूरी न्हैल़ै रहा लागी।
3हुंह बी आसा भिन्नैं दर भिन्नैं थोघै बाझ़ी ज़िऊंदअ लागअ द,
राची का बाद राची एछा मुल्है शोग ई।
4च़ैन्नै सुत्ती करा हुंह एही अरज़ कि राच लोल़ी ती छ़ेक्कै भैई,
पर सह ज़ाण्हिंआं मुखा होर बी लाम्मी,
सारी राची रहा हुंह पाशल़ी बधल़दअ न्हैल़अ लागी कि राच केभै भैणीं।
5मेरी सारी घेरी आसा फिमशी, दुखणैं अर किल़ै पल़ै दै,
दुखणैं का आसा पाक लागअ द निटरदअ।#ईशा. 14:11
6ज़ेतरअ छ़ेक्कै राछ़े नल़पी दी भरअ द धाग्गअ मुक्का, तेता का छ़ेक्कै आसा मेरै धैल़ै लागै दै बितदै,
मेरै धैल़ै रहा बितदै लागी अर मेरी आशा बी रहा चुटदी लागी।
बिस्सरी निं आथी!
7हे परमेशर, तूह निं बिस्सरी आथी,
मेरी ज़िन्दगी आसा बागरीए झ़लारै ज़ेही,
ऐबै निं मुंह आजू खुशी भाल़णीं भेटणीं।
8हुंह हणअ ऐबै सोभिए आछी का दूर,
हुंह निं आजू कोही का शुझणअ,
ताखा बी निं हुंह शुझुई च़ाल्लअ।
9-10ज़िहअ हांढदअ बादल़ निखल़ी लुक्का,
तिहै निं हाम्हैं मणछ बी मरी करै भिई फिरी एछदै।
तेखअ निं हाम्हैं कोही लाऐ आद डाही।
11तैही निं हुंह ऐबै च़ुप्पी च़ाल्लअ रही,
मुंह खोज़णअ आपणैं दिलो दुख खुल्ही करै,
मुंह आसा भितरी बुआल़ लागै दै अर मुंह लणअ बोली।
12तंऐं किल्है आसा मुल्है इहअ पहरअ पाअ द?
हुंह कै समुंदर आसा कि समुंदरो बडअ ज़ीब आसा?
13ज़ेभै बी हुंह इहअ सोठा कि मुंह सुत्तणअ निंजा,
च़ैन्नै सुत्ती झ़ाणीं मुंह मेरी दाह का राम जाए भेटी,
14तेभै पै डरैऊआ तूह मुंह
डरैऊंणै सुपनै रहैऊ करै!
15-16होर ता होर, मेरअ शाह बोला केभै फांसी दैणा लै,
ऐहा दाह ज़िरनै का आसा मरनअ भलअ।
मुंह हुई आपणीं ज़िन्दगी का नफरत मेरअ निं ज़िऊंणेंओ शाह ई करदअ।
मुंह छ़ाडा कल्ही, मेरी आसा ज़िन्दगी ई बृथा।
17ताह कै ज़रुरत आसा मणछे,
कि ताह लागा म्हारै बारै खास्सअ सोठणअ?
18तूह करा मणछे ज़ाच़-भाल़ धैल़ अर
हर घल़ी रहा तूह हाम्हां परखदअ लागी।
19तूह आसा कबल्लअ मुंह भाल़अ लागअ द,
तूह निस्सअ मुल्है थिह घुटणेंओ बगत बी दैई।
20ज़ै मंऐं पाप बी किअ होए, तैबी बी निं मंऐं तेरअ किछ़ै बूरअ किअ,
हे मणछे पहरै करनै आल़ैआ,
तेरी नदर किल्है आसा सिधी मुल्है लागी दी,
हुंह कै ताल्है खास्सअ बोझ़ आसा।
21तूह मेरै पाप माफ अर मेरअ कशूर दूर किल्है निं करदअ?
ऐबै जाणअ हुंह तेतरी मरी,
तेखअ निं हुंह ताह लोल़ी करै बी भेटी च़ाल्लअ।”
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आयूब 7: OSJ
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