प्रकाशितवाक्य 12:1-2
प्रकाशितवाक्य 12:1-2 BGC
फेर इन बात्तां कै बाद सुर्ग पै एक बड्ड़ा निशान दिख्या, यानिके एक जनान्नी जो सूरज नै ओढ़े होड़ थी, अर चाँद उसकै पायां कै तळै था, अर उसकै सिर पै बारहा तारां का ताज था। अर वा गर्भवती थी, अर किल्की मारै थी, क्यूँके जाप्पै का दर्द उसकै होण लाग्या था, अर वा बाळक जाम्मण कै दर्द म्ह थी।





