योएल 2
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1सिय्योन म्ह नरसिंगा फूँको; मेरे पवित्र पर्वत पै साँस बाँधकै फूँको! यरुशलेम देश के सारे रहण आळे काँम्ब उठ्ठै, क्यूँके यहोवा का दिन आवै सै, बलके वो धोरै ए सै। 2वो अन्धकार अर अन्धेरै का दिन सै, वो बादळां का दिन सै अर अंधियारे की तरियां फैल्लै सै। जिस तरियां भोर का प्रकाश पहाड़ां पै फैल्लै सै, उसे तरियां एक बड़ी अर ताकतवर जात आवैगी; पुराणे बखत म्ह उसी कदे न्ही होई, अर ना उसकै बाद फेर कदे किसे पीढ़ी म्ह होवैगी।
3उसकै आगै-आगै तो आग भस्म करदी जावैगी, अर उसकै पाच्छै-पाच्छै लौ जळान्दी जावैगी। उसकै आगै की धरती तो अदन के बाग की तरियां होवैगी, पर उसकै पाच्छै की धरती उजाड़ मरुस्थल बण जावैगी, अर उसतै किमे न्ही बचैगा।
4उनका रूप घोड़यां का जिसा सै, अर वे सवारी के घोड़यां की तरियां दौड़ै सैं। 5उनके कूदण का शब्द इसा होवै सै जिसा पहाड़ां की चोटियां पै रथां के चाल्लण का, या खूँटी भस्म करदी होई लौ का, या जिस तरियां कतार बाँधे होए ताकत्त वर योद्धयां का शब्द होवै सै।
6उनकै स्याम्ही जात्ति-जात्ति के माणस पीड़ित होवै सै, सारया के मुँह फिक्के पड़े सै। 7वे शूरवीरां की तरियां दौड़ै#2:7 वे शूरवीरां की तरियां दौड़ै वे परमेसवर का सन्देस ल्यावैं सैं अर देरी न्ही करदे, ऊँच्ची दीवार शक्तिशाली आदमी नै रोक न्ही सकदी, वे फाटकां के जरिये न्ही बल्कि दीवारां पै, हमले तै लिया गया एक शहर के रूप म्ह बड़या करैं सैं।, अर योद्धयां की ढाळ शहरपनाह पै चढैं सै। वो अपणे-अपणे राह पै चाल्लै सैं, अर कोए अपणी कतार तै न्यारा न्ही चालदा। 8वे एक दुसरे नै धक्का न्ही मारदे, वे अपणी-अपणी राह पै चाल्लै सै; हथियारां का सामना करण तै भी उनकी कतार न्ही टूटदी। 9वे नगर म्ह आस्सै-पास्सै भाजदे, अर शहरपनाह पै चढैं सैं; वे घरां म्ह इसे घुसैं सैं जिसे चोर खिड़कियाँ तै घुसदे हों।
10उनकै आगै धरती काँम्ब उठ्ठै सै, अर अकास थरथरावै सै। सूरज अर चाँद काळे हो जावैं सैं, अर तारे न्ही झलकदे। 11यहोवा अपणे उस दल कै आगै अपणा शब्द सुणावै सै, क्यूँके उसकी सेना घणीए बड़ी सै; जो अपणा वचन पूरा करण आळा सै, वो ताकतवर सै। क्यूँके यहोवा का दिन बड़ा अर घणा भयानक सै; उसनै कौण सह सकैगा?
12“तोभी,” यहोवा की या वाणी सै, “इब भी सुणो, उपवास कै गैल रोन्दे-पिटदे अपणे पूरे मन तै फिरकै मेरै धोरै आओ। 13अपणे कपड़े न्ही, अपणे मन ए नै पाड़कै” अपणे परमेसवर यहोवा की और मुड़ो; क्यूँके वो अनुग्रहकारी, दयालु, देर तै छो करण आळा, करुणानिधान अर दुःख देकै पच्छताण आळा सै। 14के जाणै वो मुड़कै पछतावै अर इसी आशीष दे जिसतै थारे परमेसवर यहोवा ताहीं अन्नबलि अर अर्घ दिया जावै।
15सिय्योन म्ह नरसिंगा फूक्को, उपवास का दिन ठहराओ, महासभा का प्रचार करो; 16माणसां नै कठ्ठा करो। सभा ताहीं पवित्र करो; पुरनियां नै बुला ल्यो; बाळकां अर दूध पीण आळे बाळकां नै भी कठ्ठा करो। दुल्हा अपणी कोठड़ी तै, अर दुल्हन भी अपणे कमरे तै लिकड़ आवै।
17याजक जो यहोवा के सेवादार सैं, वे आँगण अर वेदी कै बीच म्ह रो-रोकै प्रार्थना करकै कहवैं, “हे यहोवा अपणी प्रजा पै तरस खा; अर अपणे खास भाग की बदनाम्मी ना होण दे; अर ना जात्ति-जात्ति उसकी तुलना देण पावैं। जात-जात के माणस आप्पस म्ह क्यूँ कहण पावै, ‘उनका परमेसवर कित्त रहया?’”
18फेर यहोवा नै अपणे देश कै बारै म्ह जळण होई#2:18 फेर यहोवा नै अपणे देश कै बारै म्ह जळण होई मन फिराव तै सब कुछ बदल ग्या, पैहले तो परमेसवर की सेना उनके विनाश कै खात्तर त्यार थी, वो उनका प्रधान उननै उपदेश देवै था। पर इब वो उनके खात्तर प्यार तै भरग्या सै जो उनपै करया गया नुकसान कै खात्तर पछतावै सै जिसा के खुद पै करया हो।, अर उसनै अपणी प्रजा पै तरस खाया। 19यहोवा नै अपणी प्रजा के माणसां तै जवाब दिया, “सुणो, मै अन्न अर नया दाखमधु अर ताजा तेल थमनै देण पै सूं, अर थम उननै पाकै छिक जाओगे; अर मै भविष्य म्ह गैरजात्तां तै थारी बदनाम्मी न्ही होण देऊँगा।”
20“मै उत्तर की और तै आई होई सेना नै थारे धोरै तै दूर करुँगा, अर उसनै एक निर्जल अर उजाड़ देश म्ह लिकाड़ दियुँगा; उसका आगला हिस्सां तो पूरब के ताल की और अर उसका पिछला हिस्सां पश्चिम के समुन्दर की और होगा; उसतै बदबू आवैगी, अर उसकी सड़ी गन्ध फैल्लैगी, क्यूँके उसनै घणे बुरे काम करे सैं।”
21“हे देश, तू ना डरै; तू मगन हो अर आनन्द कर, क्यूँके यहोवा नै बड़े-बड़े काम करे सैं! 22हे मैदान के पशुओं, ना डरो, क्यूँके जंगळ म्ह चराई उगैगी, अर दरखत फळण लागैंगे; अंजीर का दरखत अर दाख की बेल अपणा-अपणा जोर दिखाण लागैगीं।”
23“हे सिय्योन के माणसों, थम अपणे परमेसवर यहोवा कै कारण मगन हो, अर आनन्द करो; क्यूँके थारे खात्तर वो बारिस, यानिके बरसात की पैहली बारिस बहुतायत तै देवैगा; अर पैहल्या की तरियां आगली अर पिछली बारिस नै भी बरसावैगा।”
24“फेर खलिहाण अन्न तै भर जावैंगे, अर रसकुण्ड नये दाखमधु अर ताजे तेल तै उमड़ैगें। 25अर जिन साल्लां की फसल अर्बे नाम की टिड्डियाँ, अर येलेक, अर हासील नै, अर गाजाम नाम की टिड्डियाँ नै, यानिके मेरे बड़े दल नै जिस ताहीं मन्नै थारे बीच भेज्या, खा ली थी, मै उसका नुकसान थारे ताहीं भर दियुँगा।”
26“थम पेट भरकै खाओगे, अर छिक जाओगे, अर अपणे परमेसवर यहोवा के नाम की स्तुति करोगे, जिसनै थारे खात्तर अचम्भा के काम करे सैं। अर मेरी प्रजा की उम्मीद फेर कदे ना टूट्टैगी। 27फेर थम जाणोगे के मै इस्राएल कै बीच म्ह सूं, अर मै, यहोवा, थारा परमेसवर सूं और कोए दूसरा न्ही सै। मेरी प्रजा की उम्मीद फेर कदे ना टूट्टैगी।”
28“उन बात्तां कै बाद मै सारे प्राणियाँ पै#2:28 सारे प्राणियाँ पै सारी मानव जात्ति पै, जात्ति खास या व्यक्ति खास की कोए बात न्ही सै। अपणा आत्मा उण्डेलूँगा; थारे बेट्टे-बेटियाँ भविष्यवाणी करैंगी, अर थारे पुरनिये सपना देखैगें, अर थारे जवान दर्शन देखैगें। 29थारे दास अर दासियाँ पै भी मै उन दिनां म्ह अपणा आत्मा उण्डेलूँगा।”
30“अर मै अकास म्ह अर धरती पै चमत्कार, यानिके लहू अर आग अर धुएँ के खम्भे दिखाऊँगा 31यहोवा के उस बड़े अर भयानक दिन के आण तै पैहल्या सूरज अंधियारा होगा अर चाँद खून जिसा हो जावैगा। 32उस बखत जो कोए यहोवा तै प्रार्थना करैगा, वो छुटकारा पावैगा; अर यहोवा के वचन कै मुताबिक सिय्योन पर्वत पै, अर यरुशलेम म्ह जिन बचे होयां नै यहोवा बुलावैगा, वे उद्धार पावैंगें।”
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