YouVersion Logo
Search Icon

यशायाह 32

32
धार्मिकता का राज्य
1देक्खो#32:1 देक्खो प्रका. 19:11; इब्रा. 1:8,9, एक राजा धार्मिकता तै राज्य करैगा, अर राजकुमार न्याय तै राज करैंगे। 2हर एक अधिकारी मान्‍नो आँधी तै छिपण की जगहां, अर बौछार तै आड़ होवैगा; या निर्जल देश म्ह पाणी के झरणे, अर गरम धरती म्ह बड़ी चट्टान की छाया। 3उस बखत देखण आळयां की आँख धुँधळी न्ही होवैगीं, अर सुणण आळयां के कान लाग्गे रहवैंगे। 4उतावळयां के मन ज्ञान की बात समझैगें, अर तोतळयां की जीभ फुर्ती तै अर साफ बोल्‍लैगी। 5मूर्ख फेर सज्जन न्ही कुह्वावैगा अर ना कंजूस दानी कह्या जावैगा। 6क्यूँके मूर्ख तो मूर्खता ए की बात बोल्दा अर मन म्ह अनर्थ ए गढ़दा रहवै सै के वो अधर्म के काम करै अर यहोवा कै खिलाफ झूठ कहवै, भूखे नै भूखा ए रहण दे अर प्यासे का पाणी रोक्‍के राक्खै।#32:6 यानिके वो तो अपणे स्वभाव के मुताबिक ए बात करैगा। उसका स्वभाव ए मूर्खता की बात करणा सै, अंत म्ह वो मूर्खता ए उगळैगा। 7छळ की चाल बुरी होवैं सैं, वो दुष्ट योजना बणावै सै के गरीब नै भी झूठ्ठी बात्तां म्ह लूटै जबकि वे ठीक अर नम्रता तै भी बोल्दे हों। 8पर सज्जन माणस उदारता ए की योजना बणावै सै, वो उदारता म्ह स्थिर भी रहवैगा।
यरुशलेम की जनानियों
9हे सुखी जनानियों, उठकै मेरी सुणो; हे बेफिकर बेटियों, मेरे वचन की और कान लगाओ। 10हे बेफिकर जनानियों, साल भर तै कुछ ए घणे बखत म्ह थम कमजोर हो जाओगी; क्यूँके तोड़ण खात्तर दाख न्ही होवैगीं अर ना किसे ढाळ के फळ हाथ लागैंगे। 11हे सुखी जनानियों, थरथराओ, हे बेफिकर जनानियों, कमजोर हो; शोक मनाण खात्तर अपणे-अपणे कपड़े तारकै अपणी-अपणी कमर म्ह टाट कसो। 12वे मनभाऊ खेत्तां अर फलवन्त दाखलता खात्तर छात्ती पीटैंगी। 13मेरे माणसां#32:13 मेरे माणसां यरुशलेम के रहणआळे कै बलके खुशहाल नगर के सारे खुशी तै भरे घरां म्ह भी कई ढाळ के कटिले दरखत उपजैंगे। 14क्यूँके राजभवन छोड्या जावैगा, शोर-सराबे तै भरया नगर सुनसान हो जावैगा अर पहाड़ी अर उनपै के पहरेदारां के घर सदा खात्तर गुफा अर जंगळी गध्यां के रहण की जगहां अर घरेलू पशुआं की चराई उस बखत ताहीं बणे रहवैंगे 15जिब ताहीं परमेसवर की आत्मा उप्पर तै म्हारे पै उण्डेल्या ना जावै, अर जंगळ फळदायक बारी ना बणै, अर फळदायक बारी फेर बण ना गिणी जावै। 16फेर उस जंगळ म्ह न्याय बसैगा, अर उस फळदायक बारी म्ह धार्मिकता रहवैगी। 17अर#32:17 अर रोम. 14:7; याकू. 3:18 धार्मिकता का फळ शान्ति अर उसका नतिज्जा सदा का चैन अर बेफिकर रहणा होवैगा। 18मेरे माणस शान्ति की जगहां म्ह बेफिकर रहवैंगे, अर आराम की जगहां म्ह सुख तै रहवैंगे। 19बण के विनाश कै बखत ओळे गिरैंगे, अर नगर पूरी तरियां तै चौपट हो जावैगा। 20कितणे धन्य हो थम जो सारे जलाशयां कै धोरै बीज बोन्दे, अर बळधां अर गध्यां नै आजादी तै चराओ सो।

Currently Selected:

यशायाह 32: BGC

Highlight

Copy

Compare

Share

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in