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भजन संहिता 6

6
संकट में दया-दृष्‍टि के लिए प्रार्थना
मुख्‍यवादक के लिए। तांतयुक्‍त वाद्य-यन्‍त्रों के साथ। शमीनीत के अनुसार#6:0 अथवा संभवत: ‘षड्ज में, सप्‍तक में’ दाऊद का भजन।
1प्रभु, क्रोध से मुझे न डांट,
तू मुझे अपने रोष से ताड़ित न कर!#भज 38:1; यिर 10:24
2प्रभु, मुझ पर दया कर, क्‍योंकि मैं दुर्बल हूँ;
प्रभु, मुझे स्‍वस्‍थ कर, क्‍योंकि मेरी अस्‍थियां
बेचैन हैं,
3मेरा प्राण भी बहुत बेचैन है;
पर तू, हे प्रभु, कब तक? . . .
4प्रभु, लौट और मेरे प्राण बचा,
अपने करुण स्‍वभाव के कारण मुझे मुक्‍त
कर!
5क्‍योंकि मृत्‍यु की स्‍थिति में तेरा स्‍मरण करना
संभव नहीं;
कौन व्यक्‍ति मृतक लोक में तेरी स्‍तुति कर
सकता है?
6मैं सिसकते-सिसकते थक गया;
मैं प्रति रात अपने बिछौने को आंसुओं से
भिगोता हूं,
अश्रुधारा से मेरी शैया डूब जाती है।
7मेरी आंखें शोक से धुंधली होने लगी हैं,
मेरे बैरियों के कारण वे कमजोर हो गई हैं।
8कुकर्मियो! मुझसे दूर हो;
प्रभु मेरे विलाप पर ध्‍यान देता है।#मत 7:23
9प्रभु ने मेरी विनती सुनी है;
वह मेरी प्रार्थना भी स्‍वीकार करता है।
10मेरे शत्रु लज्‍जित और बहुत बेचैन होंगे,
वे पीठ दिखाएंगे और क्षण-भर में उनका
अपयश होगा।

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