YouVersion Logo
Search Icon

यशायाह 65

65
न्याय और उद्धार
1“मैंने अपने आपको उन लोगों में प्रकट किया,
जिन्होंने मेरे विषय में पूछताछ ही नहीं की;
मैंने अपने आपको उन लोगों के लिए उपलब्ध करा दिया,
जिन्होंने मुझे खोजने की कोशिश भी न की थी.
वह देश जिसने मेरे नाम की दोहाई ही न दी थी,
मैं उससे इस प्रकार कहता रहा,
‘देख मैं यहां हूं, मैं यहां हूं.’
2एक विद्रोही जनसमुदाय के लिए
मैं सारे दिन अपने हाथ फैलाए रहा,
जो अपनी इच्छा से बुरे रास्तों पर
चलते हैं,
3एक ऐसी जाति जो मुझे मेरे सम्मुख निरंतर क्रोध दिलाती है;
जो बागों में बलिदान चढ़ाते हैं,
और ईंटों की वेदियों पर धूप जलाते हैं,
4जो कब्रों के बीच बैठे रहते
तथा सुनसान जगहों पर रात बिताते हैं;
जो सूअर का मांस खाते,
और घृणित वस्तुओं का रस अपने बर्तनों में रखते हैं;
5वे कहते हैं, ‘अपने आप काम करिये; मत आइए हमारे पास,
आपसे अधिक पवित्र मैं हूं!’
मेरे लिए तो यह मेरे नाक में धुएं व उस आग के समान है,
जो सारे दिन भर जलती रहती है.
6“देखिये, यह सब मेरे सामने लिखा है:
मैं चुप न रहूंगा, किंतु मैं बदला लूंगा;
वरन आपके और आपके पूर्वजों के भी अधर्म के कामों का बदला आपकी गोद में भर दूंगा.
7क्योंकि उन्होंने पर्वतों पर धूप जलाया है
और पहाड़ियों पर उन्होंने मेरी उपासना की है,
इसलिये मैं उनके द्वारा
पिछले कामों का बदला उन्हीं की झोली में डाल दूंगा.”
8यहोवाह कहते हैं:
“जिस प्रकार दाख के गुच्छे में ही नया दाखमधु भरा होता है
जिसके विषय में कहा जाता है, ‘इसे नष्ट मत करिये,
अभी भी इसमें एक आशीष है,’
इसी प्रकार मैं भी अपने सेवकों के लिये काम करूंगा;
कि वे सबके सब नष्ट न हो जाएं.
9मैं याकोब के वंश को जमा करूंगा,
और यहूदिया से मेरे पर्वतों के उत्तराधिकारी चुने जाएंगे;
वे मेरे चुने हुए वारिस होंगे,
और वहां मेरे सेवक बस जाएंगे.
10शारोन में उनकी भेड़-बकरियां चरेंगी,
और गाय-बैल आकोर घाटी में विश्राम करेंगे,
क्योंकि मेरी प्रजा मेरी खोज करने लगी है.
11“परंतु आप जिन्होंने यहोवाह को छोड़ दिया है
और जो मेरे पवित्र पर्वत को भूल जाते हैं,
वे भाग्य देवता के लिए मेज़ पर खाना सजाते हैं
और भावी देवी के लिये मसाला मिला दाखमधु रखते हैं,
12मैं आपके लिए तलवार लाऊंगा,
आप सभी वध होने के लिए झुक जाएंगे;
क्योंकि आपने मेरे बुलाने पर उत्तर न दिया,
जब मैंने कहा आपने न सुना.
आपने वही किया, जो मेरी दृष्‍टि में गलत है
तथा वही करना चाहा जो मुझे नहीं भाता.”
13तब सार्वभौम यहोवाह ने कहा:
“देखिये, मेरे सेवक तो भोजन करेंगे,
पर आप भूखे रह जाएंगे;
कि मेरे सेवक पिएंगे,
पर आप प्यासे रह जाएंगे;
मेरे सेवक आनंदित होंगे,
पर आप लज्जित किए जाएंगे.
14मेरे सेवक आनंद से
जय जयकार करेंगे,
पर आप दुःखी दिल से रोते
और तड़पते रहेंगे.
15मेरे चुने हुए लोग
आपका नाम लेकर शाप देंगे;
और सार्वभौम यहोवाह आपको नाश करेंगे,
परंतु अपने दासों का नया नाम रखेंगे.
16क्योंकि वह जो पृथ्वी पर धन्य हैं
वह सत्य के परमेश्वर द्वारा आशीषित किये गए हैं;
वह जो पृथ्वी पर शपथ लेते हैं
वह सत्य के परमेश्वर की शपथ लेंगे.
क्योंकि पुरानी विपत्तियां दूर हो जाएंगी,
वे मेरी आंखों से छिप गई हैं.
नया आकाश और नयी पृथ्वी
17“क्योंकि देखिये,
मैं नया आकाश और पृथ्वी बनाऊंगा.
पुरानी बातें न सोची,
और न याद की जाएंगी.
18इसलिये मैं जो कुछ बना रहा हूं
उसमें सर्वदा मगन और खुश रहिये,
क्योंकि देखिये मैं येरूशलेम को मगन
और आनंदित बनाऊंगा.
19मैं येरूशलेम में खुशी मनाऊंगा
तथा अपनी प्रजा से मैं खुश रहूंगा;
फिर येरूशलेम में न तो रोने
और न चिल्लाने का शब्द सुनाई देगा.
20“अब वहां ऐसा कभी न होगा
कि कुछ दिन का बच्चा,
या किसी वृद्ध की अचानक मृत्यु हो जाए;
क्योंकि जवान ही की मृत्यु
एक सौ वर्ष की अवस्था में होगी;
तथा वह, जो अपने जीवन में एक सौ वर्ष न देख पाए,
उन्हें शापित माना जाएगा.
21वे घर बनाकर रहेंगे;
वे दाख की बारी लगाएंगे और उसका फल खाएंगे.
22ऐसा कभी न होगा कि घर तो वे बनाएंगे तथा उसमें कोई और रहने लगेगा;
या वे बीज बोएं, और दूसरे फसल काटें.
क्योंकि जितना जीवनकाल वृक्ष का होगा,
उतनी ही आयु मेरी प्रजा की होगी;
मेरे चुने हुए अपने कामों का
पूरा लाभ उठाएंगे.
23उनकी मेहनत बेकार न होगी,
न उनके बालक कष्‍ट के लिए उत्पन्‍न होंगे;
क्योंकि वे यहोवाह के धन्य वंश होंगे,
और उनके बच्‍चे उनसे अलग न होंगे.
24उनके पुकारते ही मैं उन्हें उत्तर दूंगा;
और उनके मांगते ही मैं उनकी सुन लूंगा.
25भेड़िये तथा मेमने साथ साथ चरेंगे,
बैल के समान सिंह भूसा खाने लगेगा,
तथा सांप का भोजन धूल होगा.
मेरे पवित्र पर्वत पर
किसी प्रकार की हानि और कोई कष्‍ट न होगा,”
यह यहोवाह का वचन है.

Currently Selected:

यशायाह 65: HCV

Highlight

Share

Compare

Copy

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in