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ग़ज़लुल-ग़ज़लात 8:6
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
मुझे मुहर की तरह अपने दिल पर, अपने बाज़ू पर लगाए रख! क्योंकि मुहब्बत मौत जैसी ताक़तवर, और उस की सरगरमी पाताल जैसी बे-लचक है। वह दहकती आग, रब का भड़कता शोला है।
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ग़ज़लुल-ग़ज़लात 8:7
पानी का बड़ा सैलाब भी मुहब्बत को बुझा नहीं सकता, बड़े दरिया भी उसे बहाकर ले जा नहीं सकते। और अगर कोई मुहब्बत को पाने के लिए अपने घर की तमाम दौलत पेश भी करे तो भी उसे जवाब में हक़ीर ही जाना जाएगा।
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