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ज़बूर 91:2
किताब-ए मुक़द्दस
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मैं कहूँगा, “ऐ रब, तू मेरी पनाह और मेरा क़िला है, मेरा ख़ुदा जिस पर मैं भरोसा रखता हूँ।”
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ज़बूर 91:1
जो अल्लाह तआला की पनाह में रहे वह क़ादिरे-मुतलक़ के साय में सुकूनत करेगा।
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ज़बूर 91:15
वह मुझे पुकारेगा तो मैं उस की सुनूँगा। मुसीबत में मैं उसके साथ हूँगा। मैं उसे छुड़ाकर उस की इज़्ज़त करूँगा।
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ज़बूर 91:11
क्योंकि वह अपने फ़रिश्तों को हर राह पर तेरी हिफ़ाज़त करने का हुक्म देगा
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ज़बूर 91:4
वह तुझे अपने शाहपरों के नीचे ढाँप लेगा, और तू उसके परों तले पनाह ले सकेगा। उस की वफ़ादारी तेरी ढाल और पुश्ता रहेगी।
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ज़बूर 91:9-10
क्योंकि तूने कहा है, “रब मेरी पनाहगाह है,” तू अल्लाह तआला के साय में छुप गया है। इसलिए तेरा किसी बला से वास्ता नहीं पड़ेगा, कोई आफ़त भी तेरे ख़ैमे के क़रीब फटकने नहीं पाएगी।
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7
ज़बूर 91:3
क्योंकि वह तुझे चिड़ीमार के फंदे और मोहलक मरज़ से छुड़ाएगा।
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ज़बूर 91:7
गो तेरे साथ खड़े हज़ार अफ़राद हलाक हो जाएँ और तेरे दहने हाथ दस हज़ार मर जाएँ, लेकिन तू उस की ज़द में नहीं आएगा।
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ज़बूर 91:5-6
रात की दहशतों से ख़ौफ़ मत खा, न उस तीर से जो दिन के वक़्त चले। उस मोहलक मरज़ से दहशत मत खा जो तारीकी में घूमे फिरे, न उस वबाई बीमारी से जो दोपहर के वक़्त तबाही फैलाए।
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