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ज़बूर 34:18
किताब-ए मुक़द्दस
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रब शिकस्तादिलों के क़रीब होता है, वह उन्हें रिहाई देता है जिनकी रूह को ख़ाक में कुचला गया हो।
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ज़बूर 34:4
मैंने रब को तलाश किया तो उसने मेरी सुनी। जिन चीज़ों से मैं दहशत खा रहा था उन सबसे उसने मुझे रिहाई दी।
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ज़बूर 34:19
रास्तबाज़ की मुतअद्दिद तकालीफ़ होती हैं, लेकिन रब उसे उन सबसे बचा लेता है।
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ज़बूर 34:8
रब की भलाई का तजरबा करो। मुबारक है वह जो उसमें पनाह ले।
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ज़बूर 34:5
जिनकी आँखें उस पर लगी रहें वह ख़ुशी से चमकेंगे, और उनके मुँह शरमिंदा नहीं होंगे।
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ज़बूर 34:17
जब रास्तबाज़ फ़रियाद करें तो रब उनकी सुनता, वह उन्हें उनकी तमाम मुसीबत से छुटकारा देता है।
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ज़बूर 34:7
जो रब का ख़ौफ़ मानें उनके इर्दगिर्द उसका फ़रिश्ता ख़ैमाज़न होकर उनको बचाए रखता है।
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ज़बूर 34:14
वह बुराई से मुँह फेरकर नेक काम करे, सुलह-सलामती का तालिब होकर उसके पीछे लगा रहे।
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ज़बूर 34:13
वह अपनी ज़बान को शरीर बातें करने से रोके और अपने होंटों को झूट बोलने से।
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ज़बूर 34:15
रब की आँखें रास्तबाज़ों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उनकी इल्तिजाओं की तरफ़ मायल हैं।
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ज़बूर 34:3
आओ, मेरे साथ रब की ताज़ीम करो। आओ, हम मिलकर उसका नाम सरबुलंद करें।
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