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ज़बूर 3:3
किताब-ए मुक़द्दस
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लेकिन तू ऐ रब, चारों तरफ़ मेरी हिफ़ाज़त करनेवाली ढाल है। तू मेरी इज़्ज़त है जो मेरे सर को उठाए रखता है।
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ज़बूर 3:4-5
मैं बुलंद आवाज़ से रब को पुकारता हूँ, और वह अपने मुक़द्दस पहाड़ से मेरी सुनता है। (सिलाह) मैं आराम से लेटकर सो गया, फिर जाग उठा, क्योंकि रब ख़ुद मुझे सँभाले रखता है।
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ज़बूर 3:8
रब के पास नजात है। तेरी बरकत तेरी क़ौम पर आए। (सिलाह)
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ज़बूर 3:6
उन हज़ारों से मैं नहीं डरता जो मुझे घेरे रखते हैं।
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