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ज़बूर 146:5
किताब-ए मुक़द्दस
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मुबारक है वह जिसका सहारा याक़ूब का ख़ुदा है, जो रब अपने ख़ुदा के इंतज़ार में रहता है।
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ज़बूर 146:3
शुरफ़ा पर भरोसा न रखो, न आदमज़ाद पर जो नजात नहीं दे सकता।
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ज़बूर 146:7-8
वह मज़लूमों का इनसाफ़ करता और भूकों को रोटी खिलाता है। रब क़ैदियों को आज़ाद करता है। रब अंधों की आँखें बहाल करता और ख़ाक में दबे हुओं को उठा खड़ा करता है, रब रास्तबाज़ को प्यार करता है।
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ज़बूर 146:6
क्योंकि उसने आसमानो-ज़मीन, समुंदर और जो कुछ उनमें है बनाया है। वह हमेशा तक वफ़ादार है।
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ज़बूर 146:9
रब परदेसियों की देख-भाल करता, यतीमों और बेवाओं को क़ायम रखता है। लेकिन वह बेदीनों की राह को टेढ़ा बनाकर कामयाब होने नहीं देता।
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