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ज़बूर 143:10
किताब-ए मुक़द्दस
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मुझे अपनी मरज़ी पूरी करना सिखा, क्योंकि तू मेरा ख़ुदा है। तेरा नेक रूह हमवार ज़मीन पर मेरी राहनुमाई करे।
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ज़बूर 143:8
सुबह के वक़्त मुझे अपनी शफ़क़त की ख़बर सुना, क्योंकि मैं तुझ पर भरोसा रखता हूँ। मुझे वह राह दिखा जिस पर मुझे जाना है, क्योंकि मैं तेरा ही आरज़ूमंद हूँ।
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ज़बूर 143:9
ऐ रब, मुझे मेरे दुश्मनों से छुड़ा, क्योंकि मैं तुझमें पनाह लेता हूँ।
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ज़बूर 143:11
ऐ रब, अपने नाम की ख़ातिर मेरी जान को ताज़ादम कर। अपनी रास्ती से मेरी जान को मुसीबत से बचा।
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ज़बूर 143:1
दाऊद का ज़बूर। ऐ रब, मेरी दुआ सुन, मेरी इल्तिजाओं पर ध्यान दे। अपनी वफ़ादारी और रास्ती की ख़ातिर मेरी सुन!
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ज़बूर 143:7
ऐ रब, मेरी सुनने में जल्दी कर। मेरी जान तो ख़त्म होनेवाली है। अपना चेहरा मुझसे छुपाए न रख, वरना मैं गढ़े में उतरनेवालों की मानिंद हो जाऊँगा।
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ज़बूर 143:5
मैं क़दीम ज़माने के दिन याद करता और तेरे कामों पर ग़ौरो-ख़ौज़ करता हूँ। जो कुछ तेरे हाथों ने किया उसमें मैं महवे-ख़याल रहता हूँ।
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