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वाइज़ 3:1
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
हर चीज़ की अपनी घड़ी होती, आसमान तले हर मामले का अपना वक़्त होता है
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वाइज़ 3:2-3
जन्म लेने और मरने का, पौदा लगाने और उखाड़ने का, मार देने और शफ़ा देने का, ढा देने और तामीर करने का
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वाइज़ 3:4-5
रोने और हँसने का, आहें भरने और रक़्स करने का, पत्थर फेंकने और पत्थर जमा करने का, गले मिलने और इससे बाज़ रहने का
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वाइज़ 3:7-8
फाड़ने और सीकर जोड़ने का, ख़ामोश रहने और बोलने का, प्यार करने और नफ़रत करने का, जंग लड़ने और सलामती से ज़िंदगी गुज़ारने का
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वाइज़ 3:6
तलाश करने और खो देने का, महफ़ूज़ रखने और फेंकने का
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वाइज़ 3:14
मुझे समझ आई कि जो कुछ अल्लाह करे वह अबद तक क़ायम रहेगा। उसमें न इज़ाफ़ा हो सकता है न कमी। अल्लाह यह सब कुछ इसलिए करता है कि इनसान उसका ख़ौफ़ माने।
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वाइज़ 3:17
लेकिन मैं दिल में बोला, “अल्लाह रास्तबाज़ और बेदीन दोनों की अदालत करेगा, क्योंकि हर मामले और काम का अपना वक़्त होता है।”
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