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1 यूहन्ना 3:18
किताब-ए मुक़द्दस
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प्यारे बच्चो, आएँ हम अलफ़ाज़ और बातों से मुहब्बत का इज़हार न करें बल्कि हमारी मुहब्बत अमली और हक़ीक़ी हो।
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1 यूहन्ना 3:16
इससे ही हमने मुहब्बत को जाना है कि मसीह ने हमारी ख़ातिर अपनी जान दे दी। और हमारा भी फ़र्ज़ यही है कि अपने भाइयों की ख़ातिर अपनी जान दें।
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1 यूहन्ना 3:1
ध्यान दें कि बाप ने हमसे कितनी मुहब्बत की है, यहाँ तक कि हम अल्लाह के फ़रज़ंद कहलाते हैं। और हम वाक़ई हैं भी। इसलिए दुनिया हमें नहीं जानती। वह तो उसे भी नहीं जानती।
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1 यूहन्ना 3:8
जो गुनाह करता है वह इबलीस से है, क्योंकि इबलीस शुरू ही से गुनाह करता आया है। अल्लाह का फ़रज़ंद इसी लिए ज़ाहिर हुआ कि इबलीस का काम तबाह करे।
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1 यूहन्ना 3:9
जो भी अल्लाह से पैदा होकर उसका फ़रज़ंद बन गया है वह गुनाह नहीं करेगा, क्योंकि अल्लाह की फ़ितरत उसमें रहती है। वह गुनाह कर ही नहीं सकता क्योंकि वह अल्लाह से पैदा होकर उसका फ़रज़ंद बन गया है।
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1 यूहन्ना 3:17
अगर किसी के माली हालात ठीक हों और वह अपने भाई की ज़रूरतमंद हालत को देखकर रहम न करे तो उसमें अल्लाह की मुहब्बत किस तरह क़ायम रह सकती है?
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1 यूहन्ना 3:24
जो अल्लाह के अहकाम के ताबे रहता है वह अल्लाह में बसता है और अल्लाह उसमें। हम किस तरह जान लेते हैं कि वह हममें बसता है? उस रूह के वसीले से जो उसने हमें दिया है।
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1 यूहन्ना 3:10
इससे पता चलता है कि अल्लाह के फ़रज़ंद कौन हैं और इबलीस के फ़रज़ंद कौन : जो रास्त काम नहीं करता, न अपने भाई से मुहब्बत रखता है, वह अल्लाह का फ़रज़ंद नहीं है।
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1 यूहन्ना 3:11
क्योंकि यही वह पैग़ाम है जो आपने शुरू से सुन रखा है, कि हमें एक दूसरे से मुहब्बत रखना है।
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1 यूहन्ना 3:13
चुनाँचे भाइयो, जब दुनिया आपसे नफ़रत करती है तो हैरान न हो जाएँ।
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