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मत्तियाह 16:24
Muktidata Yeshu Granth
MYG
तब गुरु येशु ने अपने शिष्यों से कहा, “यदि कोई मेरे शिष्य बनना चाहता, तो उसको अपना अहम त्यागना होगा, अपना क्रूस उठाना होगा और मेरे पीछे चलना होगा।
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मत्तियाह 16:18
पतरस, मेरी बात सुनो। तुम्हारे नाम का अर्थ ‘चट्टान’ है, और इस चट्टान पर मैं अपने सत्संग की नीवं डालूँगा और मृत्युलोक की शक्ति इसे रोक न पाएगी।
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मत्तियाह 16:19
मैं तुम्हें परमात्मा के परमस्वर्ग के साम्राज्य के अधिकार की चाबियाँ दूँगा। इस अधिकार को प्राप्त करके तुम्हारे द्वारा जो कुछ भी पृथ्वी पर बाँधा जाएगा परमात्मा उसे बांध चुके हैं। और जो कुछ भी तुम्हारे द्वारा पृथ्वी पर मुक्त किया जाएगा वह परमात्मा द्वारा मुक्त किया जा चुका है।”
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मत्तियाह 16:25
जो कोई अपने जीवन को बचाना चाहता है, वह उसे गंवा देगा तथा जो कोई मेरे लिए अपने जीवन की हानि उठाता है, तो वह अपने जीवन को पा लेगा।
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मत्तियाह 16:26
यदि कोई सारे संसार का मालिक बन जाए परंतु उसे मोक्ष प्राप्त न हो, तो उसे क्या लाभ? क्या संसार में मोक्ष से बढ़कर और कोई बहुमूल्य चीज़ है?
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मत्तियाह 16:15-16
प्रभु येशु ने पूछा, “पर मैं कौन हूँ? इस बारे में तुम क्या कहते हो?” शिमोन पतरस ने उत्तर दिया, “आप मुक्तिदाता और जीवित परमात्मा के पुत्र हैं!”
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मत्तियाह 16:17
प्रभु येशु ने कहा, “योना के पुत्र शिमोन, तुम पर परमात्मा का आशीर्वाद है! तुम्हारी मानवीय समझ या किसी व्यक्ति ने तुम पर यह भेद प्रकट नहीं किया, बल्कि मेरे पिता परमात्मा ने प्रकट किया है।
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