फिर यहोवा ने कहा, “मैंने मिस्र में रहनेवाले अपने लोगों के दुःखों को सचमुच देखा है, और उनकी उस पुकार को सुना है जो परिश्रम करानेवालों के कारण होती है। मैं उनकी पीड़ा को जानता हूँ। अब मैं इसलिए उतर आया हूँ कि उन्हें मिस्रियों के हाथ से छुड़ाऊँ, और उस देश से निकालकर एक अच्छे और बड़े देश में पहुँचाऊँ जिसमें दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं, अर्थात् जहाँ कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी, हिव्वी, और यबूसी लोग रहते हैं।