काहेकि परमातिमा के राज, खाँय-पिअँइ से सम्बन्धित नहिं आय, पय अगर हम पंचे परमातिमा के नजर माहीं निरदोस जीबन जी, अउर सगले मनइन से मेल-मिलाप से रही, अउर पबित्र आत्मा से मिलँइ बाले आनन्द माहीं जीबन बिताई, त परमातिमा हमरे पंचन के जीबन माहीं राज करिहँय। जे कोऊ अइसा जीबन जि के, मसीह के सेबा करत हय, त ओसे परमातिमा खुसी रहत हें, अउर सगले मनई ओखर मान-सम्मान करत हें।