अउर अब हम खुब खुसी हएन, एसे नहीं, कि तोंहईं पंचन काहीं दुख भ रहा हय, बलकिन एसे कि तूँ पंचे उआ दुख के कारन अपने गलतिन काहीं मानिके पस्चाताप किहा हय। काहेकि तोंहईं पंचन काहीं उआ दुख परमातिमा के मरजिन से मिला रहा हय, जउने हमरे पंचन के कारन तोंहईं पंचन काहीं कउनव मेर नुकसान न होय।