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प्रकाशन 5:9
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तिंयां लागै एही नऊंईं गिहा बोल्दै, “तूह आसा ऐहा कताबा खोल्हणैं अर एते मोहरा खोल्हणैं जोगी। “किल्हैकि तंऐं लऐ आपणअ बल़ीदान दैई लोहू करै हर ज़ाती, हर भाषा का, अर हर रंगे लोगा अर हर देशा का लऐ छ़ुटकारअ दैई परमेशरा लै लोग मोलै।
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प्रकाशन 5:12
तिंयां थिऐ ज़ोरै-ज़ोरै इहअ बोल्दै लागै दै, “बल़ी किअ द मिम्मूं ई आसा स्तोती अर अदर करनै जोगी किल्हैकि, “तेऊए शगती आसा महान। तेऊ आसा सोभी गल्लो ज्ञैन, तेऊ का आसा खास्सअ बल अर सह आसा असली दी सेठ।”
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प्रकाशन 5:10
“तंऐं बणाऐं तिंयां इहै लोग ज़सरअ राज़अ परमेशर आप्पै आसा अर इहै प्रोहत ज़ुंण तेऊए च़ाकरी करा अर तिन्नां करनअ पृथूई दी राज़।”
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प्रकाशन 5:13
तेखअ भाल़ै मंऐं स्वर्गै, पृथूई, पृथूई हेठै अर समुंदरे परमेशरै बणाअं द सारअ संसार, ज़ुंण बी तेथ आसा, तिंयां शूणैं मंऐं इहअ बोल्दै, “ज़ुंण राज़गाद्दी दी आसा बेठअ द, तेऊओ अर मिम्मूंओ शूकर, अदर, प्रतप्प अर राज़ लोल़ी जुगै-जुगै रहअ।”
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प्रकाशन 5:5
तेखअ बोलअ तिन्नां सैणैं मांझ़ै एकी मुखा इहअ, “लेरा निं लाऐ, भाल़, यहूदे गोत्रा का आसा सह सिह, दाबेदे आजू लुआद गअ राख्सा का ज़िती! सह आसा तैहा कताबा खोल्हणैं अर साता मोहरा चोल़णैं जोगी हुअ द।”
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