1
प्रकाशन 2:4
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
“पर मुखा शुझुई ताह दी एही गलती कि तंऐं छ़ाडअ मुखा पैहलै ज़ेही झ़ूरी करनी।
Compare
Explore प्रकाशन 2:4
2
प्रकाशन 2:5
ऐहा गल्ला लै दैऐ धैन कि तंऐं किधी किई च़ूक! आपणैं पापो प्राश्त कर, संघा कर पैहलै ज़िहअ काम। ज़ै तूह ज़ै तूह पाप करनअ नांईं छ़ाडे, तै च़कणअ मुंह ताह सेटा एछी तेरअ सदीअ तैहा ज़ैगा का पोर्ही।
Explore प्रकाशन 2:5
3
प्रकाशन 2:10
ज़ुंण दुख ताह भुगतणै, तेता का निं डरी, किल्हैकि भाल़ै, राख्सा आसा तम्हां मांझ़ै कई लाऐ दै कैद खानै पाई ताकि तम्हां परखी सके, तम्हां लागणअ दसा धैल़ै सांगट ज़िरनअ, प्राण दैणैं तैणीं रहै विश्वासी बणी, तै दैणअ मुंह ताल्है ज़िन्दगीओ मुगट।’
Explore प्रकाशन 2:10
4
प्रकाशन 2:7
“ज़ै कुंण समझ़णअ च़ाहे तै दैऐ ऐहा गल्ला दी धैन कि परमेशरे आत्मां टोली लै किज़ै बोला, ज़ुंण ज़िते तेऊ लै दैणअ मुंह ज़िन्दगीए बूटा का फल़ खाणां लै ज़ुंण स्वर्गै आसा।
Explore प्रकाशन 2:7
5
प्रकाशन 2:2
“मुखा आसा तेरै काम, मैन्थ, अर तेरै सबर करनैओ थोघ, अर इहअ बी आसा थोघ कि तूह निं कदुष्ट मणछा भाल़ी सकदी, अर ज़ुंण आप्पू लै शधाणूं बोला, पर तिंयां निं आथी, तिंयां परखै तंऐं अर तिंयां निखल़ै झ़ुठै।
Explore प्रकाशन 2:2
6
प्रकाशन 2:3
तूह आसा सबर डाही मेरी तैणीं दुख ज़िरदी लागी दी अर अज़ी बी आसा मुंह दी तेरअ भरोस्सअ पाक्कअ।
Explore प्रकाशन 2:3
7
प्रकाशन 2:17
“ज़ै कुंण समझ़णअ च़ाहे तै दैऐ ऐहा गल्ला दी धैन कि परमेशरे आत्मां टोली लै किज़ै बोला, ज़ुंण ज़िते, तेऊ लै दैणअ मुंह गुप्त ‘खाण’ अर तेऊ लै मुंह एक शेतअ पात्थर बी दैणअ अर तेऊ पात्थरा दी हणअ एक नाअं लिखअ द, तेऊ पात्थरा दी लिखै दै नाओं थोघ निं तेऊ का सुआई होरी कोही का लागणअ।
Explore प्रकाशन 2:17