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भज़न 89:15
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हे बिधाता, तूह दैआ तिन्नां मणछा लै बर्गत ज़ुंण तेरी गिहा बोली तेरी ज़ै-ज़ैकार करा अर ज़ुंण तेरी झींणें प्रैश्शै दी हांढा।
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भज़न 89:14
तेरअ राज़ आसा नसाफ अर धर्में आथरी प्रैंदै, तेरै हर कामां दी हआ झ़ूरी अर सत्त।
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भज़न 89:1
हे बिधाता, मुंह रहणअ तेरी अटल़ झ़ूरी लै गिहा बोल्दै लागी, तेरअ सत्त खोज़णअ मुंह पोस्ती दर पोस्ती।
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भज़न 89:8
ए स्वर्गे सारी सैने मालक बिधाता, तेरै मकाबलै जोधअ निं कोहै आथी, नां कुंण ताह ज़िहअ झ़ूरनै आल़अ आथी अर नां कहा का ताह ज़िहअ सत्त आथी।
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