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भज़न 82:6
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हुंह बोला इहअ, ‘तम्हैं आसा दईब अर तम्हैं आसा मुंह परम प्रधान परमेशरे पूत
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भज़न 82:3
रैनै-गरीब अर छ़ुटै-मुक्कै दै लान्हैंओ नसाफ किल्है निं तम्हैं करदै? ज़हा ज़रुरत आसा अर ज़हा आसरअ लोल़ी, तम्हैं किल्है निं तिन्नें मज़त करदै?
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भज़न 82:4
तिन्नां किल्है निं तम्हैं कदुष्ट मणछे हाथा का बच़ाऊंदै?
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भज़न 82:8
हे परमेशर, एछ, तूह कर संसारै आप्पै राज़, संसारे सोभी देशे लोग आसा तेरै ई।
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