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भज़न 81:10
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हुंह बिधाता ई आसा थारअ परमेशर ज़ुंणी तम्हैं मिसर देशे गलामी का आसा छ़ड़ैऊई आणै दै। तम्हां आसा सिधी बोल़णें बेर, हुंह दैंऊं थारी ज़रुरतीए सोभै गल्ला।
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भज़न 81:13-14
भलअ हणअ त इहअ कि तम्हैं मेरी परज़ा ज़िहअ हुंह बोले तिहअ ई शुणदै अर करदै! तै करनै तै मुंह घल़ी-पला दी थारै दुशमण खतम अर थारै बैरी पल़णीं ती मेरी मार।
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