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भज़न 25:5
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
मुखा शखैल़ आपणैं सत्ता दी ज़िन्दगी ज़िऊंणीं, मेरअ परमेशर आसा तूह ज़ुंण मुंह बच़ाऊआ। हुंह रहा सदा तेरै ई भरोस्सै।
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भज़न 25:4
हे बिधाता, तूह रहैऊ मुखा आपणीं बात, मुंह सखाऊ तेथ हांढणअ।
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भज़न 25:14
तूह बिधाता हआ तिन्नां मणछो साथी ज़ुंण तेरी डरा हेठै रहा, आपणीं करार बी करा तूह तिन्नां ई संघै पाक्की।
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भज़न 25:7
हे बिधाता, मेरै खारकी अमरा किऐ दै पाप अर गलती कर माफ। तूह कर ऐहा गल्ला प्रगट कि तूह झ़ूरा सदा अर झींण करी डाह मुंह आद।
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भज़न 25:3
ज़ुंण ताह दी भरोस्सअ करा, तिंयां निं कधि हारी सकदै, पर ज़ुंण छ़ेक्कै धोखअ दैआ, तिंयां हणैं शर्मिंदै।
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