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भज़न 149:4
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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बिधाता हआ आपणीं परज़ा लै राज्ज़ी, भोल़ै मणछा लै ज़ीत दैई बढेरा सह तिन्नें शोभा।
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भज़न 149:6
तिन्नें लोल़ी ज़ोरै-ज़ोरै परमेशरे ज़ै-ज़ैकार किई, अर हाथै लोल़ी तिन्नैं दोहरी बाखा तिछी तलबारा हुई ढाकी दी
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भज़न 149:1
सोभै करा बिधाते ज़ै-ज़ैकार! तेऊए बड़ैई करना लै बोला नऊंईं गिह, धर्मीं मणछे सभा दी करा तेऊए ज़ै-ज़ैकार।
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