1
भज़न 127:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
ज़ै घअरा बणाणां लै बिधाते ज़ाज़त निं होए, तै आसा घअर च़िणनअ बृथा। नगरीए फाज़त ज़ै बिधाता नां करै, तै आसा पहरीओ पहरअ करनअ बी बृथा!
Compare
Explore भज़न 127:1
2
भज़न 127:3-4
असली बर्गत हआ लान्हैं सुन्हैं हणैं, तिंयां हआ बिधाता हाम्हां लै आप्पू बाखा दैनी दी भैंट। खारकी पलका खास्सै शोहरू-माठै हआ शूरबीरा का खास्सै कतीरा ज़िहै
Explore भज़न 127:3-4