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भज़न 116:1-2
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हे बिधाता, हुंह झ़ूरा ताल्है खास्सअ। किल्हैकि तूह शूणां मेरी लेर-पकार। ज़ेभै बी हुंह अरज़ करा, तूह हेरा मेरी शूणीं, मुंह रहणअ सारी ज़िन्दगी ताह सेटा अरज़ करदै लागी।
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भज़न 116:5
हे बिधाता, तूह आसा भलअ अर झणैल़ू, ए म्हारै परमेशर, तूह करा खास्सी झींण।
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भज़न 116:15
ज़ै तेरअ एक बी भगत मरे, ताह हआ तेऊओ खास्सअ दुख।
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भज़न 116:8-9
हे बिधाता, तंऐं बच़ाऊअ हुंह मरनै का, तंऐं टुशै मेरी आछी का आशू अर तंऐं निं मुल्है ठोहल़ दैनी लागणै। मुंह रहणअ आपणीं ज़िऊंदी ज़िता, ताह बाखा हांढदै लागी।
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