सारी राची उझ़िआ हर पहरै भिई-भिई खल़ै,
संघा पाआ आपणैं मालक बिधाता सेटा लेर-पकार,
आपणैं दिले गल्ला दैआ तेऊ सेटा पाणीं ज़ेही तरैल़ी,
आपणीं बाहा फुआरी करा तेऊ सेटा अरज़
कि सह थारै लान्हैं शोहरू-शोहरी लै झींण करे अर
तिंयां ज़िऊंदै बच़े ज़ुंण नगरीए बाता बेहोश आसा पल़ै दै!