तेखअ किई मंऐं बिधाता सेटा एही अरज़,
“बिधाता, सह आसा तूह ज़ुंण मुंह बच़ाऊआ अर ज़ुण मुल्है बल दैआ,
ज़ेभै आफ़त पल़ी, तेभै करा मेरी मज़त तूह।
धरतीए बाढा ओर्ही एछणैं ताह सेटा देशा देशे लोग, तिन्नां बोल़णअ इहअ,
‘म्हारै दाद-बाब रहै नकली अर बृथा देअआ पिछ़ू हांढदै लागी!