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बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हे बिधाता, “इहै ई मूंऐं तेरै कई दुशमण, पर तेरी परज़ा ज़हा लै तूह झ़ूरा, तिन्नां का निखल़अ सुरज़ा ज़िहअ धुप्पअ।” तधा पोर्ही रही आजू च़ाल़्ही साला तैणीं तेऊ देशै शांती।
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