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मूल़ 26:3
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
“तूह रहणअ तिधी परदेसी ज़िहअ, पर हुंह हणअ आप्पू ताह संघै अर मुंह दैणीं ताल्है बर्गत अर अह देश दैणअ मुंह ताल्है अर आजू तेरी आद-लुआदा लै, ज़ेही मंऐं तेरै बाब आबरामा संघै करार आसा किई दी, सह करनी मुंह पूरी।
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मूल़ 26:4-5
“तेरी आद-लुआद करनै मुंह सरगे तारै ज़िहै खास्सै अर तिन्नां लै दैणअ मुंह अह सारअ देश। तिन्नां करै भेटणीं संसारे सोभी देशे लोगा बर्गत। “किल्हैकि ज़िहअ-ज़िहअ मंऐं आबरामा लै बोलअ त, तेऊ किअ मेरअ हुकम अर बधान तिहअ ई पूरअ।”
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मूल़ 26:22
खिरी कोतअ तिन्नैं एक होर कुहअ, तेता लै निं तिंयां होर फुआल झ़घल़दै आई, इहअ करै पल़अ तेऊ कुहै नाअं “रोहबोत” किल्हैकि इसहाकै बोलअ इहअ, “ऐबै दैनी हाम्हां लै बिधाता बतेर्ही बिरली ज़ैगा ताकि हाम्हैं ऐहा ज़ैगा सारै दी बस्से।”
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मूल़ 26:2
परमेशर बिधाता हुअ तिधी प्रगट संघा बोलअ इसहाका लै इहअ, “मिसर देशा लै निं डेऊई, हुंह रहैऊं ताखा कि ताह किधा लै डेऊणअ।
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मूल़ 26:25
इसहाकै बणाईं तिधी एक बेदी संघा किई तिधी परमेशर बिधाते स्तोती। तेखअ पाअ तेऊ तिधी आपणअ खिम्भ खल़अ करी डेरअ अर तेऊए दास लागै तिधी कुहै खण्हदै।
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