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ज्ञैन 11:9
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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खारकै मणछो, आपणीं ज़ुआनी दी रहा नंद। खारकी अमरा रहा राज्ज़ी-मौज़ी, तेथ करा ज़िहअ थारअ दिल च़ाहा तिहअ। ज़िहअ-ज़िहअ भाल़ी तम्हां मज़अ एछा तम्हैं करा तेथ राज़। पर ऐहा गल्ला डाहै आद कि तम्हैं ज़िहअ बी करे, तेते साबै करनअ बिधाता थारअ नसाफ।
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ज्ञैन 11:10
मन्नैं निं फिकर डाहणअ, तै रहणीं थारी देही नरोगी किल्हैकि बाल़ी अमर अर ज़ुआनी निं सदा रहंदी आथी। तेखअ हआ सोभै गल्ला बृथा।
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ज्ञैन 11:4
ज़ुंण बिझै-बादल़ै सरगा न्हैल़अ भाल़अ लागा, सह नां बऊई सकदअ अर नां लऊई सकदअ।
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ज्ञैन 11:5
नां कहा का इहअ थोघ हंदअ कि बागरी कैहा बाता डेऊई, नां कहा का इहअ थोघ हंदअ कि माए ओदरै लान्हअ किहअ करै बझ़ा! तै इहअ कुंण सका खोज़ी कि बिधाता किज़ै करनअ ज़ुंणी सोभै गल्ला आसा बणाईं दी?
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ज्ञैन 11:6
दोत्तकै तारै का उडकै तारै तैणीं रहा बऊंदै लागी। कहा का हआ थोघ कि बेज़अ टिप्पणअ कि नांईं? या फसल राम्बल़ी हणीं कि माल़ी?
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ज्ञैन 11:2
तम्हैं करनै आपणैं ढब्बै साता-आठा ज़ैगा बपारा दी लाई, किल्हैकि तम्हां का किज़ै थोघ आसा कि आजू एऊ संसारै केही ज़ेही आफ़त पल़णीं होए।
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