“धन्य सै वो माणस जो यहोवा पै भरोस्सा राक्खै सै, जिसनै परमेसवर ताहीं अपणा आधार मान्या हो। वो उस दरखत की तरियां होवैगा जो नदी कै किनारे पै लाग्या हो अर उसकी जड़ पाणी कै धोरै फैली हो; जिब धूप हो फेर उस ताहीं ना लागैगा, उसके पत्ते हरे रहवैंगे, अर सूखे साल म्ह भी उनकै बारै म्ह कुछ चिन्ता ना होवैगी, क्यूँके वो फेर भी फळदा रहवैगा।”