हम फारसी देश म्ह गुलाम तो सां ए, पर म्हारी गुलाम्मी म्ह म्हारे परमेसवर नै म्हारे ताहीं न्ही छोड़ दिया, बलके फारस के राजयां नै म्हारे पै इसी कृपा करी, के हम नया जीवन पाकै अपणे परमेसवर के भवन नै उठाण, अर इसके खण्डहरां नै सुधारण पावां, अर हमनै यहूदा अर यरुशलेम म्ह शरण मिली।