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सभोपदेशक 11:9
हरियाणवी भाषा म्ह पवित्र शास्त्र
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हे जवान, अपणी जवान्नी म्ह आनन्द कर, और अपणी जवान्नी के दिनां म्ह मग्न रह; अपणी मनमान्नी कर अर अपणी निगांह म्ह जो तन्नै सही लाग्गै उसकै मुताबिक चाल। पर यो बात जाण ले, के इन सारी बात्तां कै बारै म्ह परमेसवर तेरा न्याय करैगा।
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सभोपदेशक 11:10
अपणे मन तै खेद अर अपणी देह तै दुख दूर कर, क्यूँके बचपन अर जवान्नी दोन्नु बेकार सै।
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सभोपदेशक 11:4
जो हवा नै देख्दा रहवैगा वो बीज न्ही बोण पावैगा; अर जो बादळां नै देख्दा रहवैगा वो काट्टण भी न्ही पावैगा।
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सभोपदेशक 11:5
जिस तरियां तू हवा के चाल्लण की राह न्ही जाणदा अर किस तरियां तै गर्भवती के पेट म्ह बच्चे की हाड्डियाँ बढै़ सै, उसे तरियां तू परमेसवर का काम भी न्ही जाणदा जो सारा किमे करै सै।
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सभोपदेशक 11:6
सबेरै नै अपणा बीज बो, अर साँझ नै भी अपणा हाथ ना रोकै; क्यूँके तू न्ही जाणदा के कोणसा कामयाब होवैगा, यो या वो या दोन्नु के दोन्नु आच्छे लिकड़ैगें।
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सभोपदेशक 11:2
सात बल्के आठ माणसां नै भी हिस्सा दे, क्यूँके तू न्ही जाणदा के धरती पै के मुसीबत्त आ पड़ैगी।
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