“जै थम मेरे हुकमां नै जो आज मै थमनै सुणाऊँ सूं मन तै सुणकै, अपणे पूरे मन अर सारे जी कै गेल्या, अपणे परमेसवर यहोवा तै प्यार राक्खो अर उसकी सेवा करदे रहो, तो मै थारै देश म्ह बरसात के आदि अर अन्त दोन्नु बखतां के मिह नै अपणे-अपणे बखत पै बरसाऊँगा, जिसतै तू अपणा अन्न, नया दाखमधु, अर टटका तेल कठ्ठा कर सकैगा।