मसीह को अपने हृदय में प्रभु के रूप में सम्मान कीजिए. आप लोगों के अंदर बसी हुई आशा के प्रति जिज्ञासु हर एक व्यक्ति को उत्तर देने के लिए हमेशा तैयार रहिए, किंतु विनम्रता और सम्मान के साथ. अपना विवेक शुद्ध रखिए कि जिन विषयों में वे, जो मसीह में आप लोगों के उत्तम स्वभाव की निंदा करते हैं, लज्जित हों.