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रोमी 5:8
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मुदा परमेश्वर अपना प्रेम केँ अपना सभक प्रति एहि तरहेँ देखबैत छथि जे, जखन अपना सभ पापिए छलहुँ तखने मसीह अपना सभक लेल मरलाह।
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रोमी 5:5
और ई आशा अपना सभ केँ निराश नहि होमऽ दैत अछि, किएक तँ परमेश्वर अपन पवित्र आत्मा जे अपना सभ केँ देने छथि, तिनका द्वारा अपन प्रेम अपना सभक हृदय मे भरि देने छथि।
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रोमी 5:3-4
एतबे नहि, बल्कि कष्टक समय सभ मे सेहो आनन्दित होइत छी, किएक तँ अपना सभ जनैत छी जे कष्ट सँ धैर्य उत्पन्न होइत अछि, धैर्य सँ सच्चरित्रता आ सच्चरित्रता सँ आशा उत्पन्न होइत अछि।
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रोमी 5:1-2
एहि तरहेँ विश्वास सँ धार्मिक ठहराओल जयबाक कारणेँ प्रभु यीशु मसीहक द्वारा परमेश्वर सँ अपना सभक मेल भेल अछि। यैह यीशु मसीह अपना सभ केँ परमेश्वरक संग एहि नव सम्बन्ध मे अनने छथि जे सम्बन्ध हुनका कृपा पर आधारित अछि आ जाहि सम्बन्ध मे अपना सभ स्थिर छी। और परमेश्वरक महिमा मे सहभागी होयबाक आशा मे आनन्दित छी।
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रोमी 5:6
सोचू! अपना सभ जखन असहाये छलहुँ तहिए निर्धारित समय पर मसीह अधर्मी सभक लेल मरलाह।
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रोमी 5:9
तेँ जखन अपना सभ मसीहक खून द्वारा एखन धार्मिक ठहराओल गेलहुँ तँ निश्चय अपना सभ हुनका द्वारा परमेश्वरक दण्ड सँ सेहो बँचाओल जायब।
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रोमी 5:19
किएक तँ जाहि तरहेँ एक मनुष्यक आज्ञा-उल्लंघन सँ अनेको मनुष्य पापी भेल, ओही तरहेँ एक मनुष्यक आज्ञा-पालन सँ अनेको मनुष्य धार्मिक ठहराओल जायत।
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रोमी 5:11
एतबे नहि! अपना प्रभु यीशु मसीहक कारणेँ अपना सभ परमेश्वर मे आनन्दित सेहो छी, किएक तँ हुनके द्वारा आब परमेश्वर सँ मेल-मिलाप भऽ गेल अछि।
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