जेना कि धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे,
“कोनो मनुष्य धार्मिक नहि अछि, एको गोटे नहि।
कोनो मनुष्य बुझनिहार नहि अछि।
एको गोटे तेहन नहि अछि जे परमेश्वर केँ खोजैत होअय।
सभ केओ भटकि गेल अछि,
सभ केओ भ्रष्ट भऽ गेल अछि।
केओ नीक काज नहि करैत अछि, एको गोटे नहि।”