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रोमी 15:13
jivən səndesh
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परमेश्वर, जे आशाक स्रोत छथि, अहाँ सभ केँ परमेश्वर परक भरोसाक कारणेँ अत्यन्त आनन्द आ शान्ति सँ भरि देथि, जाहि सँ पवित्र आत्माक सामर्थ्य सँ अहाँ सभक मोन आशा सँ भरल रहय।
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रोमी 15:4
धर्मशास्त्र मे जतेक बात पहिने सँ लिखल गेल अछि से सभ अपना सभक शिक्षाक लेल लिखल गेल अछि, जाहि सँ अपना सभ ओहि धर्मशास्त्रक द्वारा धैर्य आ प्रोत्साहन पाबि अपन आशा केँ मजगूत राखि सकी।
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रोमी 15:5-6
धैर्य आ प्रोत्साहन देबऽ वला परमेश्वर अहाँ सभ केँ एहन वरदान देथि जे अहाँ सभ मसीह यीशुक शिक्षाक अनुसार आपस मे मेल-मिलापक भावना रखने रही, जाहि सँ अहाँ सभ एक मोनक भऽ एक स्वर सँ अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक परमेश्वर आ पिताक स्तुति करैत रहियनि।
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रोमी 15:7
जहिना मसीह अहाँ सभ केँ स्वीकार कयलनि, तहिना अहूँ सभ एक-दोसर केँ स्वीकार करू, जाहि सँ परमेश्वरक स्तुति होनि।
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रोमी 15:2
अपना सभ मे सँ प्रत्येक गोटे केँ अपना भायक कल्याणक लेल आ हुनका विश्वास मे मजगूत बनयबाक लेल हुनकर खुशीक ध्यान रखबाक चाही।
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