एहि चारू प्राणी मे प्रत्येक केँ छओ-छओटा पाँखि छल। ओकरा सभक सम्पूर्ण शरीर मे आ पाँखिक तर मे सेहो आँखिए-आँखि छल। ओ सभ दिन-राति बिनु अटकि कऽ ई कहैत रहैत अछि,
“सर्वशक्तिमान प्रभु-परमेश्वर,
पवित्र, पवित्र, पवित्र छथि।
ओ वैह छथि, जे छलाह, जे छथि आ जे आबहो वला समय मे रहताह।”