“अहाँ सभ ई की कऽ रहल छी?! हमहूँ सभ अहीं सभ जकाँ मनुष्ये छी! हम सभ अहाँ सभ केँ ई शुभ समाचार सुनयबाक लेल आयल छी जे अहाँ सभ निरर्थक मुरुतक पूजा-पाठ कयनाइ छोड़ि कऽ जीवित परमेश्वर जे आकाश, पृथ्वी, समुद्र और ओहि मे जे किछु अछि, तकर सभक रचना कयने छथि, तिनका पर विश्वास करू।