हुंह करा परमेशरा का अरज़ ज़ुंण आशा दैणैं आल़अ आसा, तम्हैं ज़ै विश्वास डाहे, तम्हैं लोल़ी तेऊ सोभी रंगे नंद अर शांती करै भरी दैनै, ताकि पबित्र आत्में शगती संघै थारी आशा बढदी रहे।
रोमी 15:13