ज़बूर 31:1
ज़बूर 31:1 DGV
दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। ऐ रब, मैंने तुझमें पनाह ली है। मुझे कभी शरमिंदा न होने दे बल्कि अपनी रास्ती के मुताबिक़ मुझे बचा!
दाऊद का ज़बूर। मौसीक़ी के राहनुमा के लिए। ऐ रब, मैंने तुझमें पनाह ली है। मुझे कभी शरमिंदा न होने दे बल्कि अपनी रास्ती के मुताबिक़ मुझे बचा!